नोएडा 04 जुलाई। घर खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और सरकारी कर्मचारियों की ओर से आपराधिक व्यवहार से जुड़े मामले में सीबीआई ने एक और बिल्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनी रुद्रना बिल्डवेल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड समेत उसके निदेशकों, सरकारी कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की गई है।
50 बिल्डरों के खिलाफ चल रही सीबीआई जांच
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर घर खरीदारों को धोखा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले 50 बिल्डरों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। सीबीआई की तरफ से शुक्रवार को यह 13वीं चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें बिल्डर के ऊपर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के बहाने वित्तीय संस्थानों और निर्दोष घर खरीदारों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने की आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है।
कई बिल्डर्स पर चार्जशीट हो चुकी है दाखिल
इससे पहले इसी तरह के मामलों में सीबीआई रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक, ड्रीम प्रोकान प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और उसके निदेशक, एवीजे डिवेलपर्स इंडिया प्राइवेट, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक, सिक्वल बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड, सीएचडी डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उनके निदेशकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
‘निदेशकों ने सरकारी कर्मचारियों संग रची साजिश’
चार्जशीट में कहा गया है कि रुद्रा बिल्डवेल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और उसके निदेशकों ने सरकारी कर्मचारियों और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर साजिश रची। कथित तौर पर घर खरीदारों, निवेशकों को झूठे आश्वासनों और धोखाधड़ी भरे बयानों के माध्यम से गुमराह किया और अवैध तथा कपटपूर्ण तरीकों का सहारा लेकर करोड़ों रुपये का वित्तीय लाभ प्राप्त किया। ग्रेनो अथॉरिटी के आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने स्थापित मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग किया।
खरीदारों को फ्लैट या रकम वापस नहीं मिली
चार्जशीट में लिखा कि इस साजिश में आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग, धन का हेरफेर/दुरूपयोग और घर खरीदारों के प्रति धोखाधड़ी भरा आचरण शामिल था। सीबीआई ने जांच में पाया कि बिल्डर ने 600 से अधिक फ्लैट्स के खरीदारों को लुभावने वादे और भ्रामक जानकारी देकर पैसे जमा कराए, लेकिन परियोजना पूरी नहीं की और खरीदारों को फ्लैट या रकम वापस नहीं मिली।

