नई दिल्ली, 22 जून (ता)। केंद्र सरकार ने 16 तय खुराक संयोजन (एफडीसी) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। प्रतिबंध के आदेश में कहा गया है कि इन दवाओं के इस्तेमाल का चिकित्सकीय औचित्य नहीं है और लाभ के बजाय इनके संभावित जोखिम अधिक हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत अधिसूचनाएं जारी कर प्रतिबंध लगाया गया है। मंत्रालय ने बताया कि यह कदम जनस्वास्थ्य की रक्षा, दवाओं के तर्कसंगत इस्तेमाल को बढ़ावा देने और लोगों के लिए केवल प्रभावी एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं की उपलब्धता तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ये हैं प्रतिबंधित दवा संयोजनरू एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड संग एथोहेप्टाजीन, डायसाइक्लोमाइन, पैरासिटामोल और क्लिडिनियम ब्रोमाइड, डायसाइक्लोमाइन, क्लिडिनियम ब्रोमाइड, क्लोरडायजेपॉक्साइड, ग्लिक्लाजाइड के साथ क्रोमियम पिकोलिनेट तथा पैरासिटामोल के साथ लिग्नोकेन शामिल हैं। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद लिया गया। समिति ने पाया कि इन दवाओं के संयोजन का पर्याप्त चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इनके उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं।
प्रतिबंधित दवाओं में त्वचा रोग, दर्द निवारण, ऐंठन और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि इस कदम का उद्देश्य केवल सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने राज्य औषधि नियामकों और संबंधित एजेंसियों को इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
एंटीबायोटिक एफडीसी पर रोकरू कई एंटीबायोटिक संयोजनों पर भी रोक लगाई गई है। इनमें अमॉक्सिसिलिन के साथ सेराटियोपेप्टिडेज, अमॉक्सिसिलिन, सेराटियोपेप्टिडेज और लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स, अमॉक्सिसिलिन, क्लॉक्सासिलिन, लैक्टिक एसिड बैसिलस और सेराटियोपेप्टिडेज आदि शामिल हैं।
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