अयोध्या, 10 जुलाई। श्रीराम मंदिर चढ़ावा गणना में कथित अनियमितताओं की जांच अब केवल गणना कर्मियों तक सीमित नहीं रह गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है, जिन्होंने गणना प्रक्रिया के लिए लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर में कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर बदलाव किए।
बैंक से जुड़े सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच नौ फरवरी 2024 को एक औपचारिक अनुबंध हुआ था। इसके आधार पर चढ़ावे की गणना के लिए विस्तृत एसओपी बनी थी। आरोप है कि इस निर्धारित एसओपी का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसकी जगह स्थानीय स्तर पर अलग व्यवस्था लागू कर दी गई। बताया जा रहा है कि इस स्थानीय व्यवस्था में गणना कर्मियों को निर्धारित यूनिफॉर्म के बजाय निजी कपड़ों में आने और गणना स्थल पर प्रवेश और निकास के दौरान तलाशी में ढील जैसी सुविधाएं दी गईं। चंपत राय ने सार्वजनिक रूप से इस पूरे प्रकरण में बैंक की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। इसके बाद बैंक ने भी यह पता लगाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी है कि निर्धारित एसओपी की अनदेखी किसके निर्देश पर हुई और किन अधिकारियों ने भूमिका निभाई।
चंपत राय को इस्तीफे का मलाल नहीं : गिरी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने गुरुवार को पुणे रवाना होने से पहले मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह चंपत राय से मिले। उनके मन में किसी तरह का कोई आक्रोश नहीं है। इस्तीफे को लेकर कोई मलाल भी नहीं है। वह संगठनकर्ता हैं और देश, समाज सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनका स्वास्थ्य अनुकूल है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को पहली बार राम मंदिर में चढ़ावे की गणना स्थल पर गया और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां की व्यवस्थाएं चाक चौबंद दिखाई दीं।

