२०२७ में होने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार बनाने के लिए मोदी कैबिनेट और भाजपा नेतृत्व के प्रयास तेज हो गए हैं। मौखिक जानकारी अनुसार कुछ विवादित मंत्रियों को या तो हटाया जा सकता है अथवा उनके विभाग में बदलाव हो सकता है। केंद्रीय मंत्री जार्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिटटू को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया गया इसलिए उनके स्थान पर और दो मंत्रियों को बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा उप्र एवं दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी संभाल रहे हैँ। इसलिए एक पद व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का यह विस्तार मानसून सत्र से पहले हो सकता है। यह भी चर्चा है कि भाजपा की नई कमेटी के सदस्यों की घोषणा और मंत्रिमंडल में बदलाव एक साथ हो सकता है। तीसरे वित्तमंत्री पद के लिए आरबीआई के पूर्व गर्वनर शक्तिकांत दास का नाम भी लिया जा रहा और कॉकरोच पार्टी द्वारा शिक्षामंत्री धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भले ही सरकार महत्व ना दे लेकिन जिस प्रकार परीक्षाओं में पेपर लीक के बाद बवाल मचा उसे देखकर लगता है कि शिक्षामंत्री को कोई और पद दे दिया जाए। कुल मिलाकर यह सब चुनाव जीतने और सत्ता में बने रहने के लिए वक्त की सबसे बड़ी मंाग कही जा सकती है क्योंकि उप्र और उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है। पार्टी का प्रयास है कि पंजाब में आप सरकार का सफाया और भाजपा की सरकार हो। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम को काम करने का मौका और उनकी परीक्षा भी हो जाएगी। बाकी सब जानते हैं कि चुनाव में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं उनकी टीम का सम्मोहन चारों तरफ चल रहा है। इन विधानसभा चुनावों में क्या होगा। मगर आम आदमी द्वारा विनती की जा रही है और कहते हैं कि टेलौपैथी ऐसी व्यवस्था है कि आप जो सोचते हैँ आपके नजदीक रहने वाले व्यक्तियों तक वह पहुंच जाती है और जनता की भावनाओं से नेतृत्व अवगत हो ही जाता है। आम मतदाताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेरा मानना है कि जिसे भी मंत्रिमंडल में काम करने का मौका दिया जाए उसकी पूष्ठभूमि का ध्यान रखा जाए ओर देखा जाए कि लोकसभा चुनाव में जीत के बाद उसने अपने क्षेत्र में कितना काम किया और क्या छवि है। क्योंकि सिर्फ नामचीन व्यक्तियों को मंत्री बना दिया जाए तो उससे वोटों का रुझान भाजपा के उम्मीदवारों के समर्थन में होना जरुरी नहीं है। जो भी मंत्री बनाया जाए उससे नागरिकों की भावना जुड़ी हो और पार्टी कार्यकर्ता उसे पसंद करते हों। यह इस वक्त की सबसे बड़ी मांग है क्योंकि तीन प्रदेशों में सरकार बनाना भाजपा के लिए जरुरी है क्योंकि २०२९ के चुनाव में इसका लाभ और नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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