केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक आम आदमी को बैंक से सबंध सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। कुछ पुराने नियमों को भी समाप्त किया गया है या उनमें ढील दी गई है लेकिन जानकारों के अनुसार बैंक अधिकारियों की हठधर्मी से पात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह जरुर है कि जो खबरें पढ़ने सुनने देखने को मिलती है उनसे पता चलता है कि जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ बैंकों के मैनेजर अथवा लोन देने वालों द्वारा अपने चहेतों को देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। समाचार पत्रों में खबरों के अनुसार बैंक मैनेजरों, लोन पास करने वालों और लेने वालों द्वारा मिलीभगत कर चहेतो को खूब लाभान्वित कर रहे हैं। साल भर में लगभग १५० दिन देश में बैंक कर्मियों द्वारा गबन करने, लोन देने में भ्रष्टाचार, फर्जी हस्ताक्षरों से रुपया निकालने की खबरें खूब मिलती है। यूपी के मेरठ में बीते दिनों विकास भवन सभागार में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में डीएम के साथ हुई बैठक में बैंक अधिकारियों की पोल खोली और उनकी कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए अनेक आरोप लगाए। यह देश के एक जिले में लाभान्वित होने वालों की दुखद गाथा थी। जो जिलाधिकारी के सामने बैंक कर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यक्त की गई। लेकिन अभी एक खबर पढ़ी थी कि एक बैंक ने एक मकान पर दो बार लोन दे दिया और अपनी गलती सुधारने की बजाय उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करना शुरू किया। हंगामा होने पर संबंधित बैंक कर्मचारियोंपर कार्रवाई हुई। मेरा मानना है कि अगर पीएम की हर आदमी को लाभ पहुंचाने की योजनाओं को केंद्रीय वित्तमंत्री आगे बढ़ाने के साथ साथ जो योजना उनके विभाग द्वारा नागरिकों के हित में चलाई जा रही है उनका लाभ पात्र व्यक्तियों को दिलाना चाहती है तो बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वो तय योजनाओं के तहत किसी को भी परेशान ना करे। और जो उसके लिए अधिकृत है उन्हें हर योजना का लाभ बिना कठिनाईयों के उपलब्ध कराया जाए। सबसे बड़ी बात यह स्प्ष्ट हो कि लोन के लिए आवेदन के समय ही जरुरी कागजों की सूची हिंदी में ग्राहक को उपलब्ध कराई जाए। लोन के फार्म कम शब्दों में उपलब्ध हो। यह तय हो कि लोन कितने समय में दिया जाएगा अगर उतने समय में नहीं दिया जाता तो बैंक मैनेजर व अन्य की कार्यप्रणाली की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्योंकि अब समय आ गया है कि जब सरकार नागरिकों के लिए कुछ करने की सोच रही है तो सुविधा भुगत रहे बैंक अधिकारी और कर्मचारी छुटिटयों की मांग करने के साथ अपने बैंक की समस्याओं के समाधान करने की कोशिश करें और सरकार की मंशा पूरी करने के लिए कोई घोटाले में फंसता है तो उसे सस्पेंड कर बाहरी अधिकारी से जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर समय से पहले सेवानिवृति दी जाए और उसकी कार्यप्रणाली के चलते ग्राहक या सरकार को कोई नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई दोषी की व्यक्तिगत संपत्ति से कराएं और इस बारे में अब कई मामलों में अदालत भी निर्णय देने लगी है। सूचना का अधिकार से संबंध सूचना आयुक्त तो आए दिन जुर्माने लगाते ही हैं। इन्हें सूचना आयुक्तों को अधिकार दिया जाए कि वह भ्रष्टचार में लिप्त व्यक्ति पर जुर्माने की जांच होने पर संबंधित की सेवाएं समाप्त रखी जाएं। अगर जुर्म सिद्ध हो जाता है तो सेवानिवृति दे दी जाए और अन्य लाभ भी खत्म हो क्योंकि जो वेतन व सुविधाएं यह भुगत रहे हैं वो आम आदमी के पैसों से होने वाले लाभ से प्राप्त होती है तो एक प्रकार से आर्थिक राहत देने का मुख्य अधिकार देने का नागरिकों को परेशान का इन्हें कोई अधिकार नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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