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    Home»देश»दिल्ली के होटल में लगी आग के बाद जिम्मेदार हुए सक्रिय, ज्यादातर के पास नहीं है एनओसी! मेरठ में 5 सिविल लाइन में खुले कारीगरी होटल व गढ़ रोड पर अवैध निर्माण में बने कॉम्पलैक्स द कैपिटल में खुले स्टूडियो एक्सो, हल्दीराम गढ़ रोड, सिविल के आईएडएफसी और साकेत मार्ग पर बेकरी
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    दिल्ली के होटल में लगी आग के बाद जिम्मेदार हुए सक्रिय, ज्यादातर के पास नहीं है एनओसी! मेरठ में 5 सिविल लाइन में खुले कारीगरी होटल व गढ़ रोड पर अवैध निर्माण में बने कॉम्पलैक्स द कैपिटल में खुले स्टूडियो एक्सो, हल्दीराम गढ़ रोड, सिविल के आईएडएफसी और साकेत मार्ग पर बेकरी

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 5, 2026No Comments74 Views
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    मेरठ 05 जून (दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित लवकेश बजाज के होटल फ्लोरिश में बीती तीन जून को लगी आग के बाद हमेशा ही भांति पुलिस और अन्य विभागों के अफसर हरकत में आए और कार्रवाई शुरु की। बताते हैं कि जिस समय होटल में आग लगी हुई थी उसका मालिक लवकेश बजाज वहां से कार में निकल गया। उसने अंदर फंसे लोगेां को बचाने में मदद की भी जरुरत नहीं समझी। एक खबर के अनुसार १२ विदेशी नागरिकों सहित २१ की मौत की खबरें पढ़ने को मिल रही हैं। इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बाद अब पुलिस और अन्य विभागों के लोगों द्वारा की जा रही जांच में सामने आया है कि बिना फायर एनओसी के चल रहा था होटल। छह कमरों की अनुमति थी और २५ बना दिए थे। गैर इरादतन हत्या के केस में होटल मालिक गिरफ्तार हो गया है। मजिस्ट्रेटी जांच भी शुरू हो गई है। कहा जा रहा है बिना फायर एनओसी के चल रहे भवनों में सील की कार्रवाई होगी। होटल मालिक चार दिन की पुलिस रिमांड पर है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने इस बारे में बैठक बुलाई और वो मरीजो को देखने अस्पताल भी गई।

    एक समाचार के अनुसार पीड़ितों को मुआवजे की भी खबर है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह सिद्धू ने एमसीडी के अधिकारियों को अवैध निर्माण चिन्हित कर उन्हें ध्वस्त करने की योजना का निर्देश दिया। तो एनसीआर में स्थित ओयो की आड़ मं चल रहे होटलों में मानकों की धज्ज्यिां उड़ाई जा रही है क्योंकि ३०० में से सिर्फ ३० के पास फायर एनओसी है। प्रशासन ने होटलों व अस्पतालों की जांच के लिए टीम बनाई है। मेडा ने भी इस घटना के बाद होटलों में सर्वे के लिए टीम तैयार की है। सवाल यह उठता है कि यह सब इंतजाम और जांच बड़ा हादसा होने के बाद ही क्यों शुरू होते हैं और बिना किसी कार्रवाई के कुछ दिनों बाद काबजों में बंद होकर रह जाती है। बीते दिनों जब एक इंस्टीटयूट के बेसमेंट में पानी भरा और आगजनी की घटना हुई थी तब जिम्मेदारों ने बड़े बड़े दावे कर अभियान चलाए मगर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई इससे संबंध कोर्ठ सूचना पढ़ने को नहीं मिली।

    मेरा मानना है कि कि ऐसी घटनाएं और अवैध निर्माण व नियम विरूद्ध बने संस्थानों पर कार्रवाई और जानों को जाने से रोकन है तो देशभर के सभी जिलों में गांव देहातों तक इनके लिए दोषी अफसरों पर कार्रवाई हो। उन्हें जेल भेजकर नुकसान की भरपाई उनकी निजी संपत्ति से हो और समय से पहले सेवानिवृत किया जाए क्योंकि जब तब ऐसे निर्माणों के लिए जिम्मेदार अफसरों व कर्मचारियों पर सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तब तक इस तरह की घटनाएं रुक पाना संभव नहीं है। जैसा कि लवकेश के होटल में हुआ। छह कमरों की अनुमति लेकर २५ बना दिए।

    मेरठ में भी हमेशा की भांति फायर विभाग, मेडा और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं लेकिन यह सक्रियता हमेशा रहेगी ऐसा लगता नहीं है। अगर वाकई कार्रवाई करना चाहते हैं तो गढ़ रोड स्थित हल्दीराम के शोरुम, मेरठ कॉलेज के निकट पांच सिविल लाइन पुरान २६८ हाउस नंबर बांउड्री रोड पर अवैध रुप से बनी बिल्डिंग में आईएडएफसी बैंक और कारीगरी होटल खुलने वाला है। दूसरी तरफ गढ़ रोड पर द कैपिटल में खुले एक्स सो और स्टेडियम से साकेत जाने वाले मार्ग पर खुली बेकरी आदि को देखा जा सकता है। ना तो इनमें पूरी व्यवस्थाएं हैं ना यह नियमानुसार बने हैं लेकिन फायर सर्विस और मेडा के अधिकारी इन पर इतना मेहरबान क्यों हैं कि अखबारों में खबर छपने के बाद भी कार्रवाई नहीं करते। ऐसी घटनाएं रोकनी है तो कुछ करना होगा जांच करने से कुछ होने वाला नहीं है।

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