वृंदावन, 05 मई (ता)। ठाकुर मदन मोहन मंदिर की ऐतिहासिक दीवारें एक बार फिर अपनी पुरानी चमक में नजर आने लगी हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की विज्ञान शाखा द्वारा किए गए विशेष केमिकल ट्रीटमेंट के बाद मंदिर की बाहरी दीवारों से काई, धूल और प्रदूषण की काली परत हटा दी गई है। इससे करीब 400 साल पुराने इस मंदिर का मूल स्वरूप फिर से उभरकर सामने आया है। एएसआई की अधीक्षण रसायन पुरातत्वविद रंजना पुष्कर की निगरानी में यह कार्य पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि यह काम पिछले वर्ष शुरू हुआ था और अब इसका पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस चरण में मंदिर की बाहरी दीवारों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई की गई, जिससे लाल पत्थरों की खोई हुई चमक वापस लौट आई है।
करीब छह महीने तक चले इस संरक्षण कार्य में विशेष रसायनों का उपयोग किया गया। पहले दीवारों पर जमी काई और कालिख को हटाया गया, उसके बाद उनकी सुरक्षा के लिए एक विशेष सुरक्षात्मक लेप लगाया गया। इस पूरे पहले चरण पर लगभग 22 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, जो मंदिर संरक्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। एएसआई अब मंदिर के अंदरूनी हिस्सों की दीवारों की सफाई और संरक्षण की भी योजना बना रहा है। इसके साथ ही मंदिर की उत्तरी दिशा में बाउंड्री निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित है, जिस पर करीब 37 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस कार्य की शुरुआत हो चुकी है और इसे इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस संरक्षण कार्य से न सिर्फ मंदिर की सुंदरता में वृद्धि हुई है, बल्कि यह देश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अब मंदिर पहले से अधिक आकर्षक और ऐतिहासिक महत्व के साथ दिखाई दे रहा है।
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