देश दुनिया के लोकप्रिय खेलों में क्रिकेट का नाम लिया जाता है क्योंकि हर देश की सरकार इसके आयोजन को बढ़ावा और खिलाड़ियों को पैसा और नौकरी देकर आगे बढ़ा रही है लेकिन देश के दूसरे लोकप्रिय खेल फुटबाल जिसके ३० करोड़ प्रशंसक हैं को उतना बढ़ावा नहीं दिया जा रहा। विश्वकप फुटबाल के मैचों को रातभर जागकर देखने का समय अब इसके प्रेमियों का आ गया है। भारतीय फुटबाल ऑफ साइड क्यों है। घरेलू लीग में अस्थिरता, क्लब जमीन निवेश प्रतिभा विकास की कमजोर व्यवस्था क्यों है। यह कितने आश्चर्य की बात है कि भारतीय फुटबाल टीम दुनिया की १०० शीर्ष टीमों में भी शामिल नहीं है। वैसे तो यह खेल प्रेमियों का माध्यम है कि ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन अनिश्चिता से जूझ रहे इस खेल के मूल्य में १८१.०८ करोड़ रुपये की गिरावट आई है। फुटबाल के दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। २०१८ से २५ के बीच इसके दर्शकों में २५ प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके बावजूद लोकप्रियता के मैदान पर इसके खिलाड़ी सफल क्यों नहीं हो रहे। मुझे लगता है कि फुटबाल व अन्य भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। इसके खिलाड़ियों को क्रिकेटरों की तरह सम्मान मिले। सरकार इसके खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराएं। चार साल का इंतजार इसे लेकर खत्म होगा। अमेरिका कनाड़ा मैक्सिको में फुटबाल विश्वकप शुरू होने जा रहा है। यह इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन है। यह वह मंच है जहां खिलाड़ी महान बनते बनाते हैं। मुझे लगता है कि सरकार को क्रिकेटरों की तरह फुटबालरों को सुविधा प्रोत्साहन की घोषणा करनी चाहिए और फुटबाल व अन्य खेलों को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं रखी जानी चाहिए क्योंकि जिस तरह हम स्वदेशी को बढ़ावा दे रहे हैं उसी तरह खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में कसर नहीं रखनी चाहिए। हार जीत सिक्के के दो पहलू हैं। जिसके नसीब में जीत होगी वह टीम जीतेगी और परिणामों से पता चलेगा कि कौन क्यों हारा। इतिहास रहा है कि हारने वाले भी विश्व विजेता बनकर उभरे हैं। इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए कामना करते हुए आग्रह है कि प्रशसंक टीम का उत्साह बढ़ाएं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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