नई दिल्ली, 14 मई (ता)। एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जहां लोगों की लाइफ को आसान बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ अब इसका यूज साइबर अटैक करने में भी तेजी से हो रहा है। हाल ही में सामने आए मामलों ने ये दिखा गया है कि हैकर्स अब AI टूल्स का यूज करके पहले से ज्यादा खतरनाक और फास्ट साइबर अटैक कर रहे हैं। साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले टाइम में ये चुनौती और बड़ी हो सकती है।
हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हैकर्स AI का यूज करके सॉफ्टवेयर की कमजोरियां ढूंढ रहे हैं, फर्जी ईमेल तैयार कर रहे हैं और ऑटोमेटेड अटैक कर रहे हैं। पहले जहां किसी सिस्टम की कमी ढूंढने में काफी टाइम लग जाता था, अब ये काम AI कुछ ही मिनटों में कर रहा है। इससे कंपनियां और नॉर्मल यूजर्स दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है।
साइबर सिक्योरिटी की लैंग्वेज में जीरो-डे’ उस कमजोरी को कहा जाता है, जिसकी जानकारी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी को भी नहीं होती। हैकर्स ऐसी कमियों का फायदा उठाकर सिस्टम में घुस जाते हैं। चूंकि कंपनी को इसके बारे में पता नहीं है, इसलिए शुरुआत में उससे बचाव करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI अब बड़ी मात्रा में डेटा का एनालिसिस कर सकता है और तेजी से इसमें कोई कमी खोज सकता है। इतना ही नहीं AI बेस्ड टूल्स ऐसे मैसेज और ईमेल भी बना सकते हैं जो देखकर बिल्कुल असली लग सकते हैं। आने वाले वक्त में इससे फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं।
साइबर सिक्योरिटी कम्पनीज भी अब AI बेस्ड सिक्योरिटी सिस्टम डिजाइन कर रही हैं। ये सिस्टम किसी भी सस्पीशियस एक्टिविटीज को तुरंत पहचानने और अटैक को रोकने में मदद करते हैं। कई टेक दिग्गज कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर के लिए तेजी से सिक्योरिटी अपडेट और पैच जारी कर रही हैं ताकि खामियों को वक्त रहते ठीक किया जा सके।
Trending
- नए भिखारियों की जमात जब तक नहीं सुधरेगी भिखारियों के खिलाफ अभियान चलाने का कोई औचित्य नहीं
- डिवाइडर बंद कराने से पहले नागरिकों को गडढ़ा मुक्त सडक और फुटपाथ
- सोशल मीडिया संचालक संदिग्ध खबरों के प्रसारण से बचें, महिला के अपहरण की कोशिश ने समाज में भय का माहौल बनाया
- ट्रेन में भाले या अन्य खेल उपकरण यात्री डिब्बे में ले जाना उचित नहीं
- अलीगढ़ में महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती और अशोक पाण्डेय की संपत्ति कुर्क, बैंक खाते फ्रीज
- देश के नए IB चीफ होंगे महेश दीक्षित, तपन डेका की जगह लेंगे
- चढ़ावा चोरी विवाद : चंपत राय का राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा, अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ा
- मंडलायुक्त जी ध्यान दीजिए! उच्च न्यायालय में सरकार के प्रतिबंध के बावजूद कैसे हो रहे अवैध निर्माण कंपाउंड और शमन

