चंडीगढ़, 08 जुलाई (ता)। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों दलों ने फिलहाल किसी भी चुनावी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।
बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पंजाब के बदलते राजनीतिक हालात और आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दे रखे। रिपोर्ट है कि उन्होंने आप की भगवंत मान सरकार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज में कथित हस्तक्षेप, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नशे की बढ़ती समस्या और भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक अव्यवस्था का मुद्दा रखा। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी मुद्दों को ध्यान से सुना। हालाँकि बैठक के बाद दोनों नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
दोनों नेताओं की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर चुनावी गठबंधन करेंगे? ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच पिछले कुछ महीनों से पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत चलने की ख़बरें आती रही है। हालांकि दोनों पार्टियों के नेताओं का कहना है कि चुनावी गठबंधन पर कोई चर्चा नहीं हुई है। फिर भी राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ दोनों दलों के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है।
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक और बैठक हो सकती है। कहा जा रहा है कि बीजेपी की ओर से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। बैठक में एक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल हो सकते हैं। वहीं अकाली दल की ओर से पार्टी के शीर्ष नेताओं में से कोई एक शामिल होगा। हालाँकि इस संभावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी और अकाली दल फिर साथ आते हैं तो इसका चुनाव पर असर पड़ सकता है। अकाली दल का प्रभाव अभी भी पंजाब के जाट सिख वोटरों के बीच माना जाता है, जबकि बीजेपी शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों का साथ आना चुनावी समीकरण बदल सकता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है। उधर कांग्रेस भी अपने पूरे दमखम से चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
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