नैनीताल, 28 जनवरी। नैनीताल के माँ नयना देवी मंदिर से जुड़ा जूते पहनकर प्रवेश का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसकी सत्यता अभी पुष्टि योग्य है। ट्रस्ट ने कहा है कि मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है और यदि नियम उल्लंघन हुआ है तो उसकी जांच जरूरी है।
एक ओर जहां हरिद्वार सहित उत्तराखण्ड के चारों धामों में गैर हिंदूओं का प्रवेश वर्जित करने की कवायद चल रही हैं वहीं इसी बीच नैनीताल शहर के प्रतिष्ठित शक्तिपीठ मां नयना देवी मंदिर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धार्मिक मर्यादा और मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर बहस छिड़ गई है। वायरल वीडियो में तीन मुस्लिम परिवार मंदिर परिसर से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिनके पैरों में जूते स्पष्ट नजर आ रहे हैं। यह दृश्य सामने आते ही मामला चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि संबंधित लोग हनुमान मंदिर के समीप वाले मार्ग से बाहर की ओर आते हैं। जबकि मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले जूते उतारना अनिवार्य है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के बाहर बाकायदा शू-स्टैंड की व्यवस्था की गई है और नियमों के पालन के लिए ट्रस्ट की ओर से कर्मचारी भी तैनात रहते हैं। इसके बावजूद जूते पहनकर भीतर तक पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो कब और किसने रिकॉर्ड किया। इतना जरूर है कि वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है। लोग इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा से जुड़ा मामला बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में मां नयना देवी अमर-उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह ने बताया कि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में वीडियो कैसे बना और सार्वजनिक कैसे हुआ, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मल्लीताल कोतवाली में तहरीर दी जा रही है ताकि पूरे मामले की पड़ताल हो सके।
वहीं मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नगर अध्यक्ष नितिन कार्की ने इसे मंदिर प्रबंधन की गंभीर चूक बताया है। उनके अनुसार श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े स्थल पर नियमों का इस तरह उल्लंघन होना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में उनकी ओर से भी पुलिस को शिकायत दी जाएगी। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। प्रशासन और पुलिस की भूमिका अब यह तय करेगी कि नियमों की अनदेखी कहां हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
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