नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि)। भारतीय रेल की प्रशासिनक अक्षमता और स्टाफ की कमी के चलते अत्याधुनिक भारी भरकम मशीनें रेल पटरी की सेहत जांचने के बजाय डिपो की शोभा बढ़ा रही हैं। पटरियों का एक्स-रे करने वाली यह मशीनें वर्षों तक तक बेकार खड़ी रहीं।
सरकार ने रेल पटरियों की समयबद्ध जांच के लिए अत्याधुनिक ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) की खरीद की। इनकी विशेषता यह है कि मशीनें चलते हुए पटरियों की ज्यामितीय और संरचनात्मक स्थिति का पता लगा लेती है। रेलवे के पास ऐसी 1,100 से अधिक मशीनें हैं। लेकिन इनको चलाने वाले कर्मचारियों की भारी कमी है। इस बात का खुलासा लोक लेखा समिति (पीएसी) ने गत दिवस संसद में अपनी रिपोर्ट में किया। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (दिल्ली-भुवनेश्वर रेलमार्ग ) और उत्तर पूर्व फ्रंटियर रेलवे (दिल्ली-गुवाहाटी) के कुछ सेक्शनों में टीआरसी मशीनें 1881 दिनों तक जंग खाती रहीं। करीब पांच वर्ष तक असुरक्षित पटरियों पर ट्रेन परिचालन जारी रहा। मशीनें ब्लॉक (ट्रैक खाली मिलने का समय) न मिलने या स्टाफ की कमी से डिपो में खड़ी रहीं। समिति ने कहा, मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की भारी किल्लत है। एक मशीन के लिए कम से कम 5-7 तकनीकी कर्मियों (एसएसई, जेई, और कुशल हेल्पर) की आवश्यकता होती है।
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