शामली, 31 जनवरी। जनपद की बाबरी थाना पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश गत रात करीब 8 बजे किया है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके जरिए 20 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। यह कार्रवाई बाबरी थानाध्यक्ष राहुल सिसोदिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने की है।
पुलिस के मुताबिक ठग गिरोह ‘नित्याचौधरी ट्रेडिंग कंपनी’ के नाम से बैंक खाता संचालित कर रहा था। इस खाते का प्रोपराइटर नितिन कुमार पुत्र वीर सिंह निवासी बनती खेड़ा बताया गया है। गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल पर इस खाते से जुड़ी 31 शिकायतें दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
सब्जी कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर करते थे ठगी : आरोपी लोगों को सब्जी के कारोबार में भारी मुनाफा कमाने का लालच देते थे। इसके लिए वे फर्जी लिंक और नकली मोबाइल एप का इस्तेमाल करते थे। पीड़ितों को निवेश के नाम पर रकम जमा कराने के बाद एप में फर्जी मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे लोग और अधिक पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित हो जाते थे।
जांच में सामने आया कि निवेश की गई रकम को ‘म्यूल खातों’ यानी किराए पर लिए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था। एक म्यूल खाते में एक ही दिन में 1.84 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा कराई गई और उसी दिन अधिकांश धनराशि निकाल ली गई। इस खाते से देशभर से 31 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं।
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल अपराधी ठगी, साइबर अपराध या अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए करते हैं। कई बार लोग अपनी पूरी कमाई, नौकरी या कमीशन के लालच में अनजाने में अपना खाता दे देते हैं और बाद में गंभीर कानूनी परेशानी में फंस जाते हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात समेत कई राज्यों के लोगों से कुल 20 करोड़ 12 लाख 72 हजार 368 रुपए की ठगी की गई है। ठगी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा था।
पुलिस ने मुरादाबाद निवासी राहुल गोयल और हापुड़ निवासी धर्मेंद्र कुमार को शामली-मुजफ्फरनगर रोड से गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक एटीएम कार्ड, पहचान पत्र और एक कार बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार नितिन कुमार की मुलाकात धर्मेंद्र कुमार से मेरठ में हुई थी। उस समय धर्मेंद्र सब्जी और फल की होम डिलीवरी का काम करता था और उसे करंट अकाउंट की जरूरत थी। इसी जरूरत के चलते कमीशन के लालच में यह ठगी का नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य अभियुक्तों की तलाश की जा रही है। साइबर ठगी से जुड़े खातों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जानकारी लें और किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप से सावधान रहें।
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