Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • छोटे-मोटे सभी तरह के अपराधों के निस्तारण के लिए कुछ शर्तों के साथ पंच और पंचायतों के फैसलों को दी जाये मान्यता
    • सरकार महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के साथ ही अहिल्याबाई होल्कर को भी दे भारत रत्न
    • 2027 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को बांधे रखने में सफल विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मंत्रिमंडल और निगमों में मिल सकता है स्थान, रालोद के कोटे से भी मंत्री औ निगम अध्यक्ष के साथ ही डॉ सांगवान को मिल सकती है जिम्मेदारी
    • 138 डिग्री, डिप्लोमा व प्रमाण पत्र रखते हैं दशरथ
    • 10,000 करोड़ कमाने का रिकॉर्ड दीपिका पादुकोण ने बनाया
    • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अब बाइक-ऑटो या ट्रैक्टर दिखा तो 20 हजार जुर्माना
    • माता-पिता तेंदुए के जबड़े से मासूम को खींच लाए
    • दुष्कर्म का आरोप लगाकर बदलवाया सिपाही का धर्म
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»चुनाव»मतदान और चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, अलग-अलग हैं दोनों
    चुनाव

    मतदान और चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, अलग-अलग हैं दोनों

    adminBy adminApril 13, 2026Updated:April 13, 2026No Comments3 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 13 अप्रैल (जा)। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बार फिर दोहराया कि वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक नहीं है। दोनों एक-दूसरे से अलग हैं और पूरी तरह कानून के तहत संचालित होते हैं।
    सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने राजस्थान में जिला दुग्ध संघों से जुड़े एक चुनावी विवाद पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस महादेवन द्वारा लिखे फैसले में कहा गया कि वोट देने का अधिकार व्यक्ति को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाता है, वहीं चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग अधिकार है, जिस पर योग्यता, अयोग्यता और अन्य शर्तें लागू की जा सकती हैं। अदालत ने ज्योति बसु बनाम देवी घोषाल (1982) और जावेद बनाम हरियाणा राज्य (2003) के पहले के फैसलों का हवाला भी दिया।
    सिर्फ जज को दोष न दें: सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने गत दिवस कहा कि भारत में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के लिए केवल जज को ही जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी अक्सर वकीलों की बहस और कानूनी प्रक्रिया के तरीके से प्रभावित होती है।
    अर्थव्यवस्था में कानूनी प्रणाली अहम : सीजेआई
    नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने गत दिवस कहा कि देश केवल पूंजी या नीति के जरिये से 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता है, बल्कि इसमें कानूनी प्रणाली की गुणवत्ता अहम कारक होगी। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई ने यह बात कही।

    Court Order Desh New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi Voting and contesting elections are not fundamental rights; the two are distinct.
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    छोटे-मोटे सभी तरह के अपराधों के निस्तारण के लिए कुछ शर्तों के साथ पंच और पंचायतों के फैसलों को दी जाये मान्यता

    April 13, 2026

    सरकार महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के साथ ही अहिल्याबाई होल्कर को भी दे भारत रत्न

    April 13, 2026

    2027 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को बांधे रखने में सफल विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मंत्रिमंडल और निगमों में मिल सकता है स्थान, रालोद के कोटे से भी मंत्री औ निगम अध्यक्ष के साथ ही डॉ सांगवान को मिल सकती है जिम्मेदारी

    April 13, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.