आज एक खबर पढ़ने को मिली कि कानपुर के तलाकमहल इलाके में दूध में गोमूत्र मिलाकर बेचा जा रहा है। समाचार के अनुसार दो वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे बताए जाते हैं जिनमें कुछ लोग एक स्कूटी की डिग्गी खोलकर गोमूत्र अर्क निकालकर दूध में मिलाते नजर आ रहे हैँ। पुलिस ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि दूध बेचने वाले को लीवर की समस्या है वह गोमूत्र अर्क का सेवन करता है। पुलिस का कहना सही हो सकता है कि क्योंकि कुछ लोग कई बीमारियों के इलाज में गोमूत्र का सेवन करते हैं। इसका संदेश संत महात्मा भी देते रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के बारे में कहा जाता था कि वो कुछ बीमारियों के लिए गोमूत्र का इस्तेमाल करते हैं तो दूध बेचने वाले की यह बात सच हो सकती है। धोखे से किसी को अमृत पिलाना भी सही नहीं कह सकते इसलिए अगर यह अफवाह सही है तो दूध में गोमूत्र पिलाना अपराध है। धर्म के हिसाब से इसमें कोई बुराई नहीं है अगर गोमूत्र की शुद्धता तय हो तो यह हमारे ऋषि मुनि करते रहे हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि ऐसा किसी को करना नहीं चाहिए। क्योंकि खाने पीने का अधिकार आदमी का खुद का है दूसरा इसमें दखल नहीं दे सकता। इसमे लोग अपना पैसा और समय खर्च करते हैं तो निर्णय लेने का अधिकार भी उन्हीं को है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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