लखनऊ 27 मार्च। उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में घर और दुकान खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब गैर पंजीकृत प्रमोटर भी यूपी रेरा (उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण) के दायरे में आ गए हैं। अभी तक हजारों खरीदार प्रोजेक्ट पंजीकृत न होने के कारण खुद को ठगा महसूस कर रहे थे और विधिक राहत के लिए भटक रहे थे, लेकिन अब ऐसे आवंटी भी प्रभावी पैरवी के जरिये प्रतिपूर्ति और कब्जा प्राप्त कर सकेंगे।
यूपी रेरा ने रेरा अधिनियम 2016 की धारा 85 के तहत अपने सामान्य विनियम- 2019 के नियम 24 और 47 में 10वां महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जो 25 मार्च से प्रभावी हो गया है। इस निर्णय प्राधिकरण पर मुकदमों का बोझ बढ़ना तय है। वर्तमान में पंजीकृत प्रमोटरों से जुड़े 50 हजार से अधिक बाद पहले से लंबित हैं।
सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी रेरा की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी कर इसे ‘सेवानिवृत्त नौकरशाहों का पुनर्वास केंद्र’ बताया था। नई व्यवस्था लागू होने से प्राधिकरण की चुनौतियां व जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने बताया कि यह संशोधन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और आवंटियों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया प्रभावी होगी ।
रिफंड के साथ अब अन्य राहत भी
इससे पूर्व यूपी रेरा में अपंजीकृत प्रमोटरों से पीड़ित आवंटियों के लिए केवल एक बेंच संचालित थी, जो मात्र ‘रिफंड’ के प्रकरण सुनती थी। नई व्यवस्था के तहत अब अपंजीकृत योजनाओं के आवंटियों को भी पंजीकृत संस्थाओं के खरीदारों की तरह कब्जा, देरी का ब्याज और अन्य सभी विधिक राहतें मिल सकेंगी।
आवंटियों को भी राहत दिलाने के लिए संशोधन
पहली बार अपंजीकृत प्रमोटरों की संस्थाओं के आवंटियों को भी राहत दिलाने के लिए अपने सामान्य विनियम 2019 में नियम 24 और 47 के तहत 10वां संशोधन किया है। लंबे समय से असमंजस बना था कि जो परियोजनाएं रेरा में पंजीकृत नहीं हैं, उनके आवंटी क्या रेरा प्राधिकरण से राहत मांग सकते हैं और उन्हें रेरा अधिनियम के अंतर्गत कौन-सी राहत मिल सकती है।
अब नियम 24 के तहत अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटियों को न्याय के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। रेरा ऐसे सभी मामलों की सुनवाई करके शिकायतों का निस्तारण करेगा। यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा, यह संशोधन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और आवंटियों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया है। नए प्रविधान शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी व उपभोक्ता-अनुकूल बनाएंगे।
इस तरह मिलेगी राहत
गैर पंजीकृत परियोजनाओं के आवंटियों की शिकायतें अब प्राधिकरण की नियमित पीठों में सुनी जाएंगी। पीठ पहले यह तय करेगी कि परियोजना को पंजीकरण से छूट प्राप्त है या नहीं, इसके बाद गुण-दोष के आधार पर राहत प्रदान की जाएगी।
चूंकि अपंजीकृत परियोजनाओं का डेटा रेरा के पास उपलब्ध नहीं होता, इसलिए जल्द ही पोर्टल पर ‘फार्म एम के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा विकसित की जाएगी।
यदि सुनवाई के दौरान बेंच यह पाती है कि परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य है, तो वह सचिव को पंजीकरण की आवश्यक कार्रवाई के लिए अलग से संदर्भ भेजेगी।

