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    Home»देश»सुप्रीम कोर्ट ने लगाई निजी अस्पतालों को फटकार
    देश

    सुप्रीम कोर्ट ने लगाई निजी अस्पतालों को फटकार

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 18, 2026No Comments5 Views
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    नई दिल्ली, 18 जुलाई (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की मासूम बच्ची को भर्ती करने से इनकार करने वाले दो निजी अस्पतालों को कड़ी फटकार लगाई है। डॉक्टर के पेशे में निहित संवेदनशीलता नहीं दिखाने को लेकर भी तीखी आलोचना की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अस्पतालों और डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने उस बच्ची को इसलिए नजरअंदाज किया था क्योंकि वह गरीब थी। ऐसा करना मानवता को शर्मसार करने वाली आदत है और आपको अपने नाम से डॉक्टर शब्द ही हटा लेना चाहिए। बता दें कि गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की बच्ची की मौत हो गई। उस बच्ची को प्राइवेट अस्पतालों ने एडमिट करने से मना कर दिया था और इस वजह से उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    सुप्रीम कोर्ट ने उन निजी अस्पतालों को फटकार लगाई, जिन पर गाज़ियाबाद में रेप और मर्डर की शिकार चार साल की बच्ची को शुरुआती इलाज ना देने का आरोप है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर ब्श्रप् सूर्य कांत की तल्ख टिप्पणी सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा-अगर आप अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं, तो आपको अपने नाम के साथ श्डॉक्टरश् लिखने का कोई हक नहीं। अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता होती, तो सुविधा न होने पर भी आप उस बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाते।
    16 मार्च को एक शख्स ने चार साल की बच्ची को चॉकलेट दिलाने का लालच दिया था और उसे दूर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरोपी लड़की को बदहवास स्थिति में छोड़कर भाग गया था। परिजनों ने बच्ची को खून से लथपथ पाया और बच्ची तब बेहोश थी। परिजन उसे इलाज के लिए दो प्राइवेट अस्पतालों में ले गए, लेकिन वहां उसे इलाज नहीं मिला। परिजन आखिर में सरकारी अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में कहा था कि इस घटना की सबसे बड़ी बात यह है कि अस्पतालों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, स्थानीय पुलिस ने भी परिजनों को महत्व नहीं दिया और केस दर्ज करने से इनकार करते रहे। इस मामले पर जब बवाल मचा तो पुलिस ने 17 मार्च को एफआईआर दर्ज की और 18 मार्च को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। सबसे बड़ी बात ये है कि एफआईआर में पॉक्सो और सेक्शन 376 नहीं जोड़ा गया था।

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