आर्थिक तंगी और मजबूत व्यवस्थाओं तथा जनमानस से संबंध योजनाओं आदि को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु के द्वारा लिया गया निर्णय सराहनीय और प्रदेश हित का तो है ही अन्य प्रदेश भी इससे प्रेरणा लेकर आर्थिक कमजोरियों को मजबूत कर सकते हैं स्मरण रहे कि गत दिवस लगभग ४ घंटे १६ मिनट के २६-२७ के बजट भाषण में सीएम ने पिछले वर्ष के मुकाबले ३५८६ करोड़ रूपये कम बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा आरडीजी बंद करने से हर साल राज्य को ८१०५ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जिससे मालीय वित्तीय हालत को देखते हुए अगले ६ महीने तक सीएम मंत्रियों विधायकों और अफसरों के वेतन में कटौती की गयी है जिस घाटे को पूरा करने के लिए मुझे लगता है कि एक तो हिमाचल जो दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है और विश्व में पर्यटन के मामले मेें इसका अलग ही स्थान है और इसको ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार को जो आरडीजी बंद किया उसे शुरू करने के अतिरिक्त और भी ऐसी आर्थिक मदद देनी चाहिए जिससे देश के गौरव हिमाचल प्रदेश की व्यवस्था बनी रहे। क्योंकि फिलहाल तो ५४.९२८ करोड़ रुपये का जो बजट पेश किया है उससे ज्यादा नहीं तो कुछ समस्याओं का समाधान तो जरूर होगा। क्योंकि मुख्यमंत्री का वेतन ५० मंत्रियों का ३० विधायकों का २० प्रतिशत वेतन जो कटेगा वह काफी समस्याएं हल कर सकता है। बताते हैं कि क्लास वन और क्लास टू के श्रेणी के कर्मचारियों की भी सेलरी डेफर होगी जो आर्थिक स्थिति ठीक होने पर लौटा दी जायेगी क्योंकि सेलरी के साथ-साथ विधायक निधि भी २ करोड़ १० लाख रुपये से घटाकर १ करोड़ १० लाख कर दी गयी है। लेकिन महिलाओं पर सरकार ने अपनी नजर विनम्र रखी है जिससे उन पर कोई बोझ किसी भी रूप में आर्थिक ना पड़े।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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