लखनऊ, 18 मार्च (अम)। प्रदेश में पान मसाला निर्माण इकाइयों की निगरानी को और सख्त करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब इन इकाइयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की लगातार मॉनिटरिंग होगी और नियमित रिपोर्ट संयुक्त आयुक्त स्तर के सुपर नोडल अफसरों को भेजी जाएगी। कैमरों के बंद होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में कंट्रोल रूम तत्काल सचल दलों (क्विक रिस्पांस टीम) को सूचना देगा ताकि तुरंत जांच की जा सके। एक से ज्यादा इकाइयों में कैमरे बंद होने की स्थिति में सुपर नोडल अधिकारी खुद कमान संभालेंगे।
राज्य कर विभाग की व्यवस्था के तहत पान मसाला इकाइयों पर लगाए गए कैमरों की निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करेगा। सचल दलों की भी व्यवस्था बनाई गई है जिससे यदि किसी इकाई का कैमरा बंद मिले या उसकी लाइव फीड बाधित हो तो टीम तुरंत मौके पर जाकर जांच करे। अगर एक से अधिक इकाइयों में कैमरे बंद होने की स्थिति बनती है तो संबंधित क्षेत्र के सुपर नोडल अधिकारी खुद कमान संभालेंगे और पूरी कार्रवाई की निगरानी करेंगे। जरूरत पर वे मौके पर जाकर जांच भी करेंगे। वहीं, निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए क्विक रिस्पांस टीम को अलग-अलग शिफ्ट में तैनात किया गया है। इन टीमों को जिम्मेदारी दी गई है कि कैमरे बंद होने या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही हाईकोर्ट से निर्माताओं को मिल चुकी है राहत संबंधित इकाई पर पहुंचकर स्थिति का सत्यापन करें और रिपोर्ट कंट्रोल रूम को भेजें। लगातार निगरानी से उत्पादन, भंडारण और संचालन से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट पान मसाला और तंबाकू निर्माता इकाइयों के भीतर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा चुका है। पान मसाला निर्माताओं ने इस नियम को चुनौती दी थी। यह निर्देश चबाने वाली तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह ) नियम 2026 के तहत जारी किए गए थे। इन नियमों के तहत, पैकिंग मशीन वाले सभी क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी अनिवार्य की गई थी जिसे कंपनियों ने अनुचित माना था। वहीं, हाईकोर्ट ने फैक्टरी के अंदर के कैमरों पर रोक लगा दी है लेकिन विभाग ने बाहरी निगरानी को सख्त बनाने की रणनीति बनाई है। उधर, कारोबारियों का कहना है कि बाहर लगे कैमरों के खर्च संबंधी कोई शासनादेश नहीं है। सवाल उठने पर सीसीटीवी कैमरे की फंडिंग के लिए उद्यमियों पर ही दबाव है। उद्यमियों का दावा है कि इन कैमरों को लगाने का कोई लिखित आदेश नहीं है।
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