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    Home»देश»संघर्ष करते रहो मुकाम जरुर मिलेगा, 324 वर्ष पूर्व छपा था पहला दैनिक अखबार, ऑल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना ने प्रिंट मीडिया के स्थापना दिवस पर सभी को दी बधाई
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    संघर्ष करते रहो मुकाम जरुर मिलेगा, 324 वर्ष पूर्व छपा था पहला दैनिक अखबार, ऑल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना ने प्रिंट मीडिया के स्थापना दिवस पर सभी को दी बधाई

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 11, 2026No Comments13 Views
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    लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और दुनियाभर में लाखों लोगों को रोजगार देने में सक्षम प्रिंट मीडिया की शुरुआत ११ मार्च १७०२ को ३२४ साल पहले छपने वाले पहले दैनिक समाचार पत्र एलिजाबेथ मेलेट नाम की महिला ने श्द डेली कोरेंट्य के नाम से छापना शुरु किया था। पहले खबरें महीनों में कुछ दूर चलकर पहुंचती थी। इस अखबार ने लोगों तक रोजाना खबरें पहुंचाने की परंपरा शुरु की। एक पन्ने के अंग्रेजी भाषा का यह समाचार पत्र जहां तक जानकारी मिलती है अगर देखा जाए तो प्रिंट मीडिया का स्थापना दिवस भी कह सकते हैं। एक खबर के अनुसार लंदन में स्थित फ्लीट स्ट्रीट के पास यह अखबार केवल एक पन्ने का ही प्रकाशित होता था 1695 में लाइसेंसिंग एक्ट खत्म होने के बाद ही प्रेस को असली आजादी मिली थी, जिससे अखबारों की बाढ़ आ गई एक तरफ दो कॉलम में खबरें होती थीं और दूसरी तरफ विज्ञापन, ज्यादातर विदेशी खबरों का ही सार होता था अखबार का दावा था कि वे केवल तथ्य ही छापेंगे, अपनी राय नहीं, क्योंकि लोग अपनी राय बनाने की समझ रखते हैं ज्यादातर लोग युद्ध की हलचल का संक्षिप्त विवरण जानने के लिए ही अखबार पढ़ा करते थे उस समय के अन्य अखबारों के विपरीत, इस अखबार में अंदाजे या कमेंट नहीं जोड़े जाते थे इस अखबार ने लोगों तक रोजाना ताजा खबरें पहुंचाने की एक नई परंपरा की नींव रखी थी वियना का श्विएनर जीतुंग्य दुनिया का सबसे पुराना डेली अखबार था, जो करीब 320 वर्ष बाद बंद हो गया था 1605 में शुरू किया गया दुनिया का पहला प्रिंटेड अखबार श्रिलेशन्य था, जो हफ्ते में केवल एक बार ही छपता था
    पहला डेली न्यूजपेपर आइंकोमेंडे जिटुंगेन्य था, जिसकी शुरुआत 1650 में जर्मनी से हुई थी भारत का पहला प्रिंटेड अखबार श्हिकीज बंगाल गजट्य था, जिसकी शुरुआत 29 जनवरी 1780 को हुई थी डिजिटल युग में अखबार भले ही कागज से स्क्रीन पर आ गए हों, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता आज भी उन्हीं की पहचान है 11 मार्च 1702 को लंदन में दुनिया का पहला दैनिक अखबार अंग्रेजी भाषा में शुरू हुआ था। एलिजाबेथ मैलेट नाम की महिला ने श्द डेली कोरेंट्य शुरू किया था। पहले खबरें हफ्तों या महीनों में आती थीं, इस अखबार ने लोगों तक रोजा खबरें पहुंचाने की परंपरा शुरू की थी।
    ध्यान से सोंचे तो अपनी अलग धमक और प्रभाव रखने वाले समाचार पत्र और उनके संचालकों के सामने उस जमाने में भी कई परेशानियां रहीं होंगी वरना वियना का श्विएनर जीतुंग्य दुनिया का जो सबसे पुराना डेली अखबार था, वो करीब 320 वर्ष बाद बंद हो गया था। उस समय ना तो मैं था और ना समाचार पत्र निकाल रहे लोग। लेकिन इससे पता चलता है कि कठिनाई हमेशा रही। आज भी कुछ लोग प्रिंट मीडिया में पत्रकारिता को मिशनरी रुप से आगे बढ़ रहे हैं तो कुछ रोजी रोटी का माध्यम बनाकर अपने आपको स्थापित करने के साथ खबरें पाठकों तक पहुंचा रहे हैं। मगर ३२० साल पहले जिन परिस्थितियों में समाचार पत्र बंद करना पड़ा होगा वो अच्छी नहीं रहीं होंगी। मुझे लगता है कि जैसे परिस्थितियां पिछले दो दशक से समाचार पत्रों के सामने सुरसा की मुंह की भांति आज भी खड़ी है। कम या ज्यादा यहीं परिस्थितियां उस समय रहीं होंगी। किसी को यह बताने की जरुरत नहीं है कि ज्यादातर प्रकाशकों को सरकार व्यापारियों और उद्योगपतियों के पास पैसा नहीं है इसलिए आर्थिक उत्पीड़न करने के साथ लघु भाषाई समाचार पत्र संचालकों के मानसिक उत्पीड़न करने में कोई पीछे नहीं है। शायद यही कारण है कि पिछले एक दशक में काफी समाचार पत्र बंद हो गए। और कुछ सरकारी हुक्मरानों द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न के चलते बंद होने के कगार पर है।
    ऑल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना के नेशनल प्रेसीडेंट पूर्व सूचना उपनिदेशक सुरेंद्र शर्मा जैसे लोग जागरुक हैं और ऐसे ही लोगों की वजह से लघु और भाषाई समाचार पत्रों का भविष्य अभी टिका हुआ है। आज सुरेंद्र शर्मा द्वारा ३२४ साल पहले छपे अखबार का स्थापना दिवस मनाया गया। जिसके लिए उन्हें और साप्ताहिक विकास कुंज के संपादक अंकित बिश्नोई आदि को उनके प्रयासों के लिए बधाई देनी चाहिए कि ऐसे समय में भी नियमित रुप से समाचार पत्र और पत्रिकाएं बिना सहायता प्रकाशित कर रहे हैं। ११ मार्च १७०२ में छपे पहले अखबार को प्रिंट मीडिया की शुरुआत मानते हुए मैं देश दुनिया के सभी समाचार पत्र संचालकों को बधाई देना चाहता हूं कि तमाम कठिनाईयों के बाद भी वो अपने समाचार पत्र छापकर जनता तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन सभी भाईयों को समाचार पत्र की स्थापना दिवस की बधाई देते हुए शुभकामनाएं देता हूं कि जल्द ही पुराने दिन लौटेंगे और हम होंगे कामयाब एक दिन गीत हमारे मामले में सही होगा। इसलिए समस्याएं कितनी आई हमें अपने प्रकाशनों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास करते ही रहना चाहिए। क्योंकि क्षेत्र और काम कोई भी हो जिंदा वहीं लोग रहते हैं जो संघर्षों में आगे बढ़ते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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