प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पहली बार सीएम का पदभार संभालने के बाद स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रदेश में गडढा मुक्त सड़कें हों और आवागमन सुचारु बने। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भरपूर प्रयास करते नजर आ रहे है। यातायात पुलिस कभी सड़क सुरक्षा सप्ताह मना रही है तो कही चालान कर लोगों को सुरक्षित रहने का संदेश दे रही है। मगर सवाल यह उठता है कि शहर हो या देहात मुख्यमार्ग हो गली मोहल्ले जगह जगह सड़कों पर इतने गडढे है और उनमें लोग गिरकर घायल हो रहे हैं कई मौतें हो चुकी है। लेकिन पता नहीं क्या कारण है कि इन्हें सही कराने वाले विभाग के अफसर कानों में तेल डाले क्यों बैठे है। मेघदूत पुलिया से मोहनपुरी जाते समय देखा कि एक ऑटो खुली नाली में गिर पड़ा। बच्चे और सवारी घायल हो गए। एक समाचार पत्र ने खबर छापी कि मलियाना पुल के पास ढाई फुट गहरे गडढे में लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इस चौराहे पर विकास के नाम पर जो गढढे खोदे गए हैं वो दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं तो मेरठ बागपत हाईवे पर जानी ब्लॉक के पास गत सुबह मेरठ की ओर से जा रही कार २० फुट गहरी खाई में गिर गई और पलट गई। इसमें जौनपुर के बदलापुर निवासी शेर बहादुर उनकी पत्नी सुमन और अमरोहा के रहने वाले रिश्तेदार रोहित की मौके पर ही मौत हो गई। शेर बहादुर का बेटा शिवम मां फूलवती और पौत्री गंभीर रूप से घायल हो गए। राज्यसभा सदस्य डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रयासों से रेलवे रोड बागपत रोड का लिंक मार्ग तो बन गया लेकिन जैन नगर से जाने वाले मोड पर बना गढढा दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। कई लोग घायल हो चुके हैं लेकिन इसे सही कराने की फुर्सत अफसरों को क्यों नहीं है यह तो वही जाने। कैंट के वार्ड पांच में सब्जी मंडी में घुसते ही कई माह से गहरे गढडे खुले पड़े हैं। इतना ही नहीं सब्जी मंडी से सोतीगंज को जाने वाले मार्ग पर लालचंद सहाय की दुकान के आगे गढडा हादसें को निमंत्रण दे रहा है। ऐसे अनेक गडढे सड़कों पर है। जब कोई हादसा हो जाता है तो उन्हें सही कराने का काम शुरु होता है लेकिन इन्हें भरवाने का काम कब होगा यह विषय आम आदमी के सामने खड़ा है। वैसे तो यह जिम्मेदारी नगर निगम, आवास विकास मेडा और कैंट बोर्ड से संबंध है लेकिन कोई काम इस बारे में नहीं हो पा रहा तो मजबूर होकर अब लोग कहते सुने जाते हैं कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराने की बात करने वाले नेताओं की निगाह इधर क्यों नहीं जा रही यह तो वही जाने मगर पीड़ितों का कहना है कि यह कार्य गढडे भरवाने का काम डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ही करा सकते हैं क्योंकि उन्होंने जिस योजना पर निगाह डाल दी वो पूरी हो जाती है। वो हर जगह जाकर तो नहीं देख सकते मगर सड़कों में गडढे ना रहे इसके लिए वो संबंधित अफसरों को पत्र लिखकर इन्हें ठीक कराने की चेतावनी दे सकते हैं। पीड़ितों का मानना है कि उनके पत्र लिखने के बाद अफसर इस समस्या की ओर से मुंह नहीं मोड़ सकते। क्योंकि कुछ माह बाद बरसात आएगी और नालों की सफाई ना होने से सड़कों पर जलभराव में यह गडढे विलीन हो जाएंगे तो दुर्घटनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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