नई दिल्ली 13 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के गठन पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह संस्था घर खरीदारों के बजाय, दागी बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को रेरा पुनर्गठन पर विचार करने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि रेरा का गठन घर खरीदारों के लिए किया गया था, लेकिन वे पूरी तरह से निराश और हताश हैं। पीठ ने जोर देकर कहा, अगर इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी।
पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को ‘रेरा’ दफ्तर को पसंद के स्थान पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं।
राज्य सरकार व अन्य द्वारा दायर याचिका पर पीठ ने नोटिस भेजा। जिसमें हिमाचल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जो राज्य के ‘रेरा’ कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से संबंधित था। राज्य सरकार ने अधिवक्ता सुगंधा आनंद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि हिमाचल प्रदेश ‘रेरा’ दफ्तर को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का निर्णय शिमला शहर में भीड़भाड़ कम करने के लिए लिया गया था। यह पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों पर आधारित था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक
हाईकोर्ट ने इससे पहले ‘रेरा’ कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 30 दिसंबर के हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी है।

