प्रयागराज 02 फरवरी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कोरोना गाइड लाइन के उल्लंघन सहित अन्य छोटे अपराध के 28 केस वापस लेने की राज्य सरकार को अनुमति दे दी है। शेष गंभीर अपराध से जुड़े मामलों की अर्जी पर सुनवाई के लिए 26 फरवरी की तिथि नियत की है। राज्य सरकार ने कुल 72 अर्जियां दाखिल की हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों के आपराधिक केस वापस लेने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को लोक अभियोजक के जरिये 28 मामलों में संबंधित अदालतों में केस वापसी अर्जी देने तथा कोर्ट द्वारा उन्हें गुण दोष के आधार पर तय करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने एमपी एमएलए कैस वापसी मामले में स्वतः कायम आपराधिक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। अधिवक्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने दिशा-निर्देश जारी कर कहा था कि केस वापसी की अनुमति हाई कोर्ट से ली जाए। बिना हाई कोर्ट की अनुमति लिए ट्रायल कोर्ट में केस वापसी की कोई अर्जी दाखिल नहीं की जाएगा। इसके बाद सरकार की तरफ से अर्जियां दाखिल की गई थीं। धारा 321 में राज्य सरकार को आपराधिक केस वापस लेने का अधिकार दिया गया है।
इन जनप्रतिनिधियों को मिलेगी फिलहाल राहत
उमा भारती, संजीव बलियान, राजपाल बालियान, प्रसन्न चौधरी, उमेश मलिक, सुरेश राणा, कुमार भारतेंदु, प्रदीप चौधरी, सीमा द्विवेदी, ठाकुर जयवीर सिंह, अभिजीत सिंह, विजेंद्र सिंह, अनिल सिंह, विवेकानंद पांडेय, नीलम सोनकर, अनिल कुमार, मीनाक्षी सिंह, जय मंगल कनौजिया, अशरफ अली, वेदप्रकाश गुप्ता, जय प्रकाश निषाद, विक्रांत सिंह, योगेश चौधरी, मुकुल उपाध्याय व सुरेंद्र सिंह।
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि सरकार कोरोना मामले में केस वापस लेने की नीति तैयार करेगी. हाईकोर्ट ने केस वापसी की गाइडलाइन जारी करते हुए छोटे अपराध की वापसी की 28 अर्जियों को प्रक्रिया में छूट देते हुए स्वीकार कर लिया और गंभीर अपराध के मामलों में दाखिल अर्जियों में अनुमति पर विचार करेगी.

