मुंबई। अभिनेत्री यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने कहा कि निचली अदालत का फैसला उनके लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं हैए क्योंकि इन वर्षों में उन्हें एहसास हुआ कि देश में हर नागरिक के साथ विधि के समक्ष समान व्यवहार नहीं किया जाता। एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुकदमे के दौरान उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मानवीय विवेक न्यायिक निर्णयों को कैसे प्रभावित कर सकता है। हालांकिए पीड़िता ने यह स्वीकार किया कि हर अदालत एक ही तरह से काम नहीं करती है।
पीड़ित अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि वर्षों के दर्दए आंसुओं और भावनात्मक संघर्ष के बादए मुझे एक कड़वी सच्चाई का एहसास हुआ है कि विधि के समक्ष इस देश में हर नागरिक के साथ समान व्यबहार नहीं होता। उन्होंने खुशी जताई कि छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। पीड़िता ने कहा कि आठ सालए नो महीने और 23 दिन बादए आखिरकार मुझे एक बहुत लंबी और दर्दनाक यात्रा के अंत में आशा की एक छोटी सी किरण दिखाई दी। छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया है और इसके लिए में आभारी हूं। फैसले के बाद दी पहली प्रतिक्रिया निचली अदालत के फैसले के बाद अभिनेत्री की यह पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया हैए जिसमें यौन उत्पीड़न मामले में दोषी पाए गए छह लोगों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई हैए जबकि इसी मामले में मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया गया है।
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