मेरठ 03 अगस्त (प्र)। अपने पति की हत्या करने के बाद मेरठ के जिला कारागार में बंद आधा दर्जन से अधिक हत्यारोपी महिलाएं ही यहां कैद नहीं हैं, बल्कि इस जेल में हाई प्रोफाइल मामलों के 31 कैदी भी अपनी सजा को काट रहे हैं। इनमें कई अपराधी तो ऐसे हैं, जो बम विस्फोट साथ-साथ आतंकवादी गतिविधियों को भी अंजाम दे चुके हैं। इन हाई प्रोफाइल कैदियों को बंद रखने के लिए जिला कारागार में ही हाई सिक्योरिटी सेल भी बना हुआ है। हालांकि यहां आने के बाद कैदियों की दिनचर्या के साथ-साथ उनके आचरण में भी गजब का सुधार हुआ है तथा वह अब अपनी बाकी जिंदगी शांति के साथ समाज के बीच ही रहकर जीने की ख्वाहिश में रोज दिन गिन रहे हैं कि कब उनकी रिहाई का परवाना आये और वह भी खुली फिजा में सांस ले सकें। ढाई हजार कैदियों की क्षमता वाले मेरठ जिला कारागार में इस समय 1947 कैदी बंद हैं। इनमें 63 महिला कैदी हैं। इसी जेल में हाई प्रोफाइल सिक्योरिटी के 31 कैदियों को भी रखा गया है। इन कैदियों में बम विस्फोट और आतंकवादी गतिविधियों के शामिल हैं।
कई खुराफाती बाहरी जेलों में शिफ्ट
जिला कारागार में बंद कई खुराफाती बदमाशों को दूसरे जनपदों की जेलों में शिफ्ट कराया गया है। 2022 के विधान सभा चुनाव समय में चुनावी माहौल बिगाड़ने की संभावनाओं को भांपते हुए प्रशासन ने परीक्षितगढ़ के कालू और दौराला के गोलू गैंग के यहां बंद बदमाशों सिद्धार्थ विनीत और हर्ष समेत चार बदमाशों को दूसरी जेल में शिफ्ट किया। यह इसलिए किया गया कि उनके बीच गैंगवार न छिड़ जाये। दोनों गैंग के दो-दो सदस्य मेरठ जिला जेल से अन्यत्र भेजे गये जिन चार बदमाशों को दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया, उनमें हक्का गुर्जर डेरियो उर्फ हर्ष और सिद्धार्थ कसाना कालू गैंग के सदस्य हैं, जबकि विनीत बडोली व एक अन्य गोलू गैंग से जुड़े हैं। जेल सूत्रों की माने तो इन चारों को अलग-अलग जेलों में भेजा गया।
सोशल मीडिया से जेल प्रशासन की टेंशन
जिला कारागार में कई हाई प्रोफाइल कैदी बंद होने के साथ इनसे जुड़ी हर गतिविधियों पर देश विदेश की मीडिया की नजर है। इनमें कई तो अपने पतियों की हत्या करने के बाद कारागार में बंद होकर पछतावे की जिंदगी गुजार रही हैं। इन महिला कैदियों की छोटी से छोटी खबर या टिप्पणी की सोशल मीडिया पर न्यूज जैसे ही फ्लैश होती है तो बाहर चर्चाओं का माहौल गर्मा जाता है। कुछ दिन पहले कुछ शातिरों की तरफ से सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट डलवाई गई, इसके बदले में दूसरे गैंग के सदस्यों ने भी पलटवार करते हुए कई पोस्ट डाली। इन पोस्ट के सोशल मीडिया पर डाले जाने के बाद टकराव के हालात बनने लगे थे जेल के भीतर हुई घटना के बाद जेल प्रशासन की ओर से रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी गई।
शातिर अब गुजार रहे शराफत की जिंदगी
जिला जेल अपनी आधुनिक सुविधाओं, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों और सुधार 1 बदियों कार्यक्रमों के लिए जानी जाती है। यहां की शिक्षा के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) का अध्ययन केंद्र और कौशल विकास के तहत सिलाई व खेलकूद का सामान बनाने की फैक्टरी संचालित होती है। बंदियों को उच्च शिक्षा और साक्षरता से जोड़ने की सुविधा दी जाती है।
जिला कारागार वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ वीरेश राज शर्मा का कहना है कि जेल में हमारे लिए सारे बंदी एक समान हैं तथा किसी से उसके अपराध के आधार पर पक्षपात नहीं किया जाता है। हमारी जेल में घास काटने जैसे सख्त कार्य सिर्फ पुरुष कैदी ही करते हैं। सभी कैदियों की दिनचर्या के अनुसार उन्हें कार्य दिया जाता है। जेल में हाई सिक्योरिटी सेल में और अधिक सुरक्षा बढ़ाई गई है।

