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    Home»देश»पांच वर्ष में सौ करोड़ से अधिक आय वाले चार गुना बढ़े
    देश

    पांच वर्ष में सौ करोड़ से अधिक आय वाले चार गुना बढ़े

    adminBy adminJuly 28, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 28 जुलाई (ता)। देश में अरबपतियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में कम से कम चार गुणा बढ़ी है। इस बात का पता गत दिवस लोकसभा में वित्त मंत्रालय की तरफ से दिए गए एक जवाब से चलता है जिसमें कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में देश में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सकल आय रिपोर्ट करने वाले व्यक्तियों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है।
    वित्त राज्य मंत्री पकंज चौधरी के अनुसार, आयकर रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या अधिक की सकल आय बताने वाले व्यक्तियों की संख्या जहां निर्धारण वर्ष 2021-22 में 142 थी वहीं 2025-26 में यह 576 हो गई है।
    हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 1961 या आयकर अधिनियम, 2025 में ‘बिलियनेयर’ (अरबपति) शब्द की कोई वैधानिक परिभाषा नहीं है। साथ ही धनकर अधिनियम, 1957 को एक अप्रैल 2016 से समाप्त कर दिया गया था, इसलिए करदाताओं की कुल संपत्ति का कोई आंकड़ा सरकार के पास उपलब्ध नहीं रहता है।
    इसके अलावा आय असमानता के संदर्भ में मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच व्यय का अंतर कम हो रहा है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों का गिनी गुणांक 0.237 और शहरी क्षेत्रों का 0.284 रहा, जो 2022-23 के क्रमशः 0.266 और 0.314 से कम है। इससे ग्रामीण-शहरी अंतराल सिकुड़ता दिख रहा है।
    गिनी गुणांक असमानता का एक प्रमुख सांख्यिकीय माप है। यह शून्य के करीब होने पर अधिक समानता और एक के करीब होने पर अधिक असमानता को दर्शाता है। सर्वेक्षण में औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (एमपीसीई) ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग नौ प्रतिशत बढ़कर 4,122 रुपये और शहरी क्षेत्रों में आठ प्रतिशत बढ़कर 6,996 रुपये हो गया।
    शहरी-ग्रामीण एमपीसीई अंतर 2011-12 के 84 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 71 प्रतिशत और 2023-24 में और घटकर 70 प्रतिशत रह गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग की तेज वृद्धि को रेखांकित करता है। इसके अलावा, सबसे निचले आय वर्ग के परिवारों का खर्च ऊपरी वर्ग की तुलना में तेज गति से बढ़ा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोग असमानता कम हुई।
    गैर-खाद्य वस्तुओं (जैसे परिवहन, चिकित्सा, मनोरंजन आदि) का हिस्सा भी बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के कुल व्यय का करीब 53 प्रतिशत और शहरी में 60 प्रतिशत इस क्षेत्र में हो रहा है, जो दर्शाता है कि ग्रामीण परिवार भी आधुनिक उपभोग की ओर बढ़ रहे हैं।
    वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया है कि प्रगति समीक्षा 2023 के अनुसार 2015-16 से 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का अनुपात 24.85 प्रतिशत से घटकर 14.96 प्रतिशत रह गया। इस दौरान लगभग 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।

    Desh Economic New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi The number of individuals with an income exceeding ₹100 crore has quadrupled over five years.
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