यह सही है कि दस बीस रुपये के प्लास्टिक के नोटों को प्रचलन में लाने के प्रयासों कोअमलीजामा पहनाते हुए दस और बीस रुपये के प्लास्टिक के नोटों को मंजूरी मिल गई बताई जाती है। इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते कि कागजी नोटों के मुकाबले इनकी उम्र ज्यादा होती है। अध्ययन से पता चलता है कि प्लास्टिक के नोटों की उम्र के बारे में गत सोमवार को केंद्र सरकार ने आरबीआई को इस प्रकार के नोट लाने की मंजूरी दे दी। अभी इनका स्वरूप क्या होगा यह स्पष्ट नहीं है। अगर ये प्रचलन में रहे तो एक साल के ट्रायल के बाद ५०, १००, २००, और ५०० के नोटों को भी इनमें दिया जा सकता है क्योंकि इससे कागज की बचत होगी और पेड़ों का हो रहा कटान रुकेगा। लेकिन अब हम एक लाख रुपये लेकर निकले तो किसी को पता नहीं चलता औरजब प्लास्टिक के नोटों को लेकर निकलेंगे तो पेंट पायजामा लटकते रहेंगे। पर्यावरण की दृष्टिसे इन नोटों को लाने से पहले यह तय करना चाहिए कि इनका वजन कम हो और आम आदमी हजार दो हजार लेकर जा सके। प्रयास अच्छा है अगर सही उपयोग हो सके तो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- मुख्यमंत्री जी अभी हजारो हेक्टेयर भूमि और कब्जा मुक्त हो सकती है अफसर शिकायतों का कर रहे हैं फर्जी निस्तारण ढूंढने से भी खेती व कृषि की जमीन
- बाईपास पर एक नामी कंपनी के स्टोर की चर्चा, रेडिसन ब्लू संगरीला द ललिता अशोका जैसे होटलों और नामचीन कंपनियों के सेल्स
- कच्ची कॉलोनियां काटकर और अवैध निर्माण करने तथा सरकारी जमीन घेरकर बेचने वालों के खिलाफ देशभर में चलेगा बुल्डोजर सुविधा शुल्क लेने वाले भी बचा नहीं पाएंगे
- पत्रकारों के साथ जो जनप्रतिनिधि करते थे अब युवाओं के साथ कर रहे हैं
- छोटा हसनपुर से सिसौली तक भाजपा ने निकाली तिरंगा यात्रा
- प्रो. उषा सिंह मेजर पद पर हुईं पदोन्नत
- दीपके का ऐलान, जंतर-मंतर पार्ट 2 जल्द
- रक्षाबंधन पर परिवहन निगम छह दिन अतिरिक्त बसों का संचालन करेगा
