सरधना 16 जुलाई (प्र)। लगता है कि हिंदू मुस्लिम एकता और रंगा जमुनी तहजीब की पहचान माने जाने वाले एतिहासिक बूढ़ा बाबू मेले का आयोजन इस वर्ष नहीं हो सकेगा। मेले के लिए उपयुक्त भूमि का चिकरण न होने के कारण प्रशासन मे आयोजन के लिए मन कर दिया है। जाहिर है कि इससे दशकों पुरानी परंपरा पर विराम लग गया है और क्षेत्र के लोगों में निराशा है। एसडीएम का कहना है कि फिलहाल कांवड़ यात्रा की तैयारी प्राथमिकता पर है। ऐसे में आयोजन संभव नहीं है।
कस्बे में बूढ़ा बाबू मेले आयोजन को लेकर पिछले कई महीनों से असमंजस की स्थिति बनी थी। एसडीएम उदित नारायण सेंगर ने सुरक्षा मानकों को देखते हुए पहले ही परंपरा ना टूटे। स्पष्ट कर दिया था कि रामलीला मैदान में दमकल विभाग के वाहनों के आवगमन के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यहां मेले के आयोजन की अनुमति देना संभव नहीं होगा। इसके बाद नगर पालिका चेयरपर्सन सबीला बेगम ने मेले के लिए मंडी परिसर को वैकल्पिक स्थल के रूप में कर मेले के आयोजन के निर्देश दिए। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराना है। मेले के लिए अभी तक कोई उपयुक्त भूमि चिह्नित नहीं हो सकी है। ऐसे में बूढ़ा बाबू मेले का आयोजन संभव नहीं है।
गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है मेला
कस्बे का ऐतिहासिक बूढ़ा बाबू मेला वर्ष 1952 से भी पहले से आयोजित होता आ रहा है। इसे हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है। मेले में हर व मुशायरे कवि सम्मेलन, एक शाम खाटू श्याम के नाम सहित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते है। यह मेला समान्यतः जून मे शुरू होकर जुलाई के मध्य तक चलता है और इसके बाद कांवड़ यत्रा प्रारंभ हो जाती है।
एसडीएम उदित नारायण सेंगर का कहना है कि जमीन चिह्नित नहीं हुई है। फिलहाल कांवड़ मेले की तैयारी प्राथमिकता पर है। अगर जमीन नहीं मिली तो सभंवत मेले का आयोजन नहीं होगा।
नपा सरधना चेयरपर्सन सबीला बेगम का कहना है कि मेले के आयोजन को लेकर एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। शत प्रतिशत प्रयास रहेगा कि परंपरा ना टूटे।

