नई दिल्ली 15 जुलाई। बांग्लादेश से करीब तीन दशक से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन की फिर से अपने ‘दूसरे घर’ कोलकाता में रहने की इच्छा पूरी हो सकती है अरसे से भारत में रेजिडेंट परमिट पर रह रहीं लेखिका के लिए प. बंगाल सरकार कोलकाता में रहने संबंधी प्रस्ताव भेजने पर विचार कर रही है। करीब 20 साल बाद तसलीमा कोलकाता लौट रही हैं। वह एक अगस्त को रविंद्र सदन में कट्टरपंथ विरोधी कवि-लेखक सम्मेलन में हिस्सा लेंगी।
तसलीमा को 2007 में बंगाल की बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार मुस्लिम कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध के बाद राज्य से निकाल दिया था। बांग्लादेश से निर्वासित होने के बाद 2004 में कोलकाता आईं तसलीमा को माकपा सरकार ने तो ठुकराया ही, 2011 में वाम मोर्चा का किला ढहाने वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार से भी उन्हें कोई ‘ममता’ नहीं मिली इस बीच अमेरिका-यूरोप में लंबे प्रवास के बाद भारत लौटीं तसलीमा ने कई बार बांग्लादेश और प. बंगाल की एक जैसी संस्कृति का हवाला देते हुए कोलकाता को अपना दूसरा घर बताया। दस साल से मिल रहा रेजिडेंट परमिट तसलीमा बीते करीब दस सालों से राजधानी में रह रही हैं। इस दौरान उनके रेजिडेंट परमिट का कार्यकाल लगातार बढ़ाया गया है। गौरतलब है कि तसलीमा आतंकी संगठनों की धमकी के बीच 2015 में अमेरिका चली गई थीं। हालांकि वह 2017 से लगातार भारत में हैं।
वर्ष 2007 में तसलीमा की पुस्तक द्विखंडित को लेकर कोलकाता में विरोध प्रदर्शन होने पर वाम मोर्चा सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगा दिया और मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में तसलीमा को बिना बताये कोलकाता से जयपुर की फ्लाइट में बैठा दिया। केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार ने भी मामले में दिलचस्पी नहीं ली। हालांकि तब गुजरात के सीएम व वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने तसलीमा को अपने राज्य में रहने का न्योता दिया था तसलीमा ने यूरोप व अमेरिका को ठिकाना बनाया और 2011 में भारत लौटीं।
कट्टरपंथ के खिलाफ बड़ा संदेश
बंगाल सरकार के सूत्र के मुताबिक अगर तसलीमा मानीं तो उनका कोलकाता में रहने का इंतजाम कर दिया जाएगा। कट्टरपंथ विरोधी लेखक-कवि सम्मेलन का आयोजन इस दिशा में पहली कड़ी है।

