मेरठ, 15 जुलाई (प्र)। आवासीय भवनों में संचालित स्कूलों, अस्पतालों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। यहां हजारों निजी विद्यालयों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि आदेश का व्यापक स्तर पर पालन कराया गया तो सबसे बड़ा नुकसान लाखों विद्यार्थियों की पढाई और हजारों शिक्षकों- कर्मचारियों की आजीविका को होगा। ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय लोकदल (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के प्रदेश महासचिव कवलजीत सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल मेरठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिले (शहरी और ग्रामीण क्षेत्र) में लगभग 3,650 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। इनमें से करीब 3,500 छोटे विद्यालय ऐसे हैं, जो इस आदेश के दायरे में आ सकते हैं। इन विद्यालयों में लगभग 7 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आदेश के बाद स्कूल संचालकों, अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता और भय का माहौल है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में लगभग 85 प्रतिशत निजी विद्यालय ऐसे परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जिन पर इस आदेश का प्रभाव पड़ सकता है। यदि पूरे देश में इसी तरह कार्रवाई हुई तो लाखों विद्यालय, करोड़ों विद्यार्थी, लाखों शिक्षक और अन्य कर्मचारी सीधे प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि यह केवल भवनों का मामला नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों के भविष्य और लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय है। कवलजीत सिंह ने बताया कि स्कूल संगठनों को विस्तृत आदेश की प्रति मिलने का इंतजार है। संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल तीन प्रमुख कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पहला, संवैधानिक प्रावधानों के तहत सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में अपील करना। दूसरा, जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करना । तीसरा, मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखना। उधर, सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में आवासीय भवनों में संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है। यहां 44 आवासीय परिसरों को चिन्हित किया गया था, जिनमें अमेरिकन स्कॉलर्स, डीआरएस पब्लिक स्कूल, हैप्पी आवर्स स्कूल, मॉडर्न मास्टर्स स्कूल और सम्राट एजुकेशनल पब्लिक स्कूल शामिल हैं। वहीं एमपीएस में आंशिक सीलिंग की कार्रवाई की गई थी। इन पांच विद्यालयों को, जिन पर पहले से सीलिंग की कार्रवाई हो चुकी है, भवनों को स्वीकृत आवासीय नक्शे के अनुरूप करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में आवश्यक संशोधन नहीं किए गए, तो आवास विकास परिषद नियमानुसार अवैध निर्माण वाले हिस्से को ध्वस्त करने की कार्रवाई करेगी। कवलजीत सिंह का कहना है कि मेरठ के बचे हुए विद्यालयों में इतनी क्षमता और पर्याप्त स्थान ही नहीं है कि एक साथ लगभग सात लाख विद्यार्थियों का समावेशन किया जा सके।
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