नई दिल्ली 13 जुलाई। डिजिटल बैंकिंग प्रणाली के तहत आज आपके खर्च करने की प्रवृत्ति से लेकर आपकी जीवन भर की कमाई का सारा रिकॉर्ड बैंकों के पास मौजूद है। ऐसे में तेजी से बढ़ते एआई के दौर में साइबर जोखिम देश की वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती भी बन सकता है। आरबीआई की रिपोर्ट में इस पर गंभीर चिंता जताई गई है।
हाल ही में रिजर्व बैंक द्वारा जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट-2026 में कहा गया कि साइबर हमलों से बैंकिंग सेवाएं, भुगतान प्रणाली और ग्राहकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। मौजूदा समय में अधिकांश बैंकों के पास अपना कोई मजबूत तकनीकी सिस्टम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान साइबर हमलों की स्थिति में अधिकांश वित्तीय संस्थानों को नियंत्रण पाने में 24 घंटे तक का समय लगा।
एक-तिहाई बैंक और वित्तीय संस्थानों ने माना कि बीते एक साल में साइबर जोखिम पहले की तुलना में बढ़ा है। 93 फीसदी वित्तीय संस्थान साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों जैसे सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर, क्लाउड सुरक्षा, घटना प्रतिक्रिया, थ्रेट इंटेलिजेंस और कमजोरियों की जांच के लिए बाहरी कंपनियों पर आंशिक या काफी हद तक निर्भर हैं।
अगले 12 महीनों में सबसे बड़े साइबर हमलों का जोखिम
साइबर जोखिम उत्तरदाताओं का प्रतिशत
एआई-सक्षम साइबर खतरे 95
थर्ड-पार्टी / सप्लाई चेन जोखिम 70
रैनसमवेयर / मैलवेयर 28
एपीआई / एप्लिकेशन कमजोरियां 23
फ़िशिंग / सोशल इंजीनियरिंग 23
कमजोर प्रबंधन / पैच प्रबंधन 14
● नोट- सर्वे में शामिल बैंकों द्वारा श्रेणीवार माने गए जोखिम का प्रतिशत।
बैंक और एनबीएफसी आउटसोर्सिंग के भरोसे
आरबीआई ने 33 बैंकों और 10 एनबीएफसी के बीच सर्वे कराया। सामने आया कि ये सेवाएं प्रदान करने के लिए आउटसोर्सिंग यानी थर्ड पार्टी पर निर्भर हैं। सारा डेटा और अहम जानकारी थर्ड पार्टी कंपनियों के हाथों में है।
12 महीनों में एआई आधारित साइबर हमले सबसे बड़ा साइबर जोखिम हो सकते हैं क्योंकि सर्वे में 95 फीसदी संस्थानों ने इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया। एआई के कारण हमले पहले से अधिक जटिल और बड़े पैमाने पर हो सकते हैं।

