हासन (कर्नाटक) 10 जुलाई। कर्नाटक के सकलेशपुर में आयोजित ‘कटहल और आम मेले’ में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. जहां, एक विशालकाय कटहल को देखकर लोग दंग रह गए. आमतौर पर कटहल का वजन 20 से 25 किलो होता है, लेकिन इस मेले में आए 72 किलो के कटहल ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
सकलेशपुर तालुक बागवानी विभाग के वरिष्ठ सहायक निदेशक, बी.ई. भानुप्रकाश ने ईटीवी भारत को बताया, “जहां तक मुझे पता है, बागवानी विभाग में इस वजन की कटहल की कोई किस्म मौजूद नहीं है. इस बात की जांच की जा रही है कि क्या ये दुनिया के सबसे बड़े और सबसे भारी कटहल हैं. इन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड में भेजने की प्रक्रिया चल रही है.”
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आंकड़ों के अनुसार, सबसे भारी कटहल 2024 में फ्लोरिडा, अमेरिका में मिला था, जिसका वजन 54.43 किलो है. आमतौर पर कटहल का वजन 20 से 25 किलो होता है. पूरी संभावना है कि ये फल गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे. यदि इनका वजन और आकार सबसे बड़ा साबित हो जाता है, तो हेब्बानहल्ली के ये विशाल कटहल रिकॉर्ड बुक में शामिल हो जाएंगे.
हेब्बानहल्ली में कटहल के बागान के मालिक एच.बी. प्रताप कुमार ने श्रीनिवास कन्वेंशन हॉल में लगे इस मेले में अपने बगीचे के तीन कटहल प्रदर्शन के लिए रखे थे. प्रताप कुमार ने इस अनोखे पेड़ की कहानी साझा करते हुए बताया, “23 साल पहले मेरे पिता बसवलिंगप्पा इस कटहल की किस्म को हालेबीडु से लाए थे और उन्होंने ही इसे लगाया था. पिछले दस सालों से हमारे यहां इस आकार के फल मिल रहे हैं, जिनका औसत वजन 60 किलो से 80 किलो तक होता है. एक पेड़ पर ऐसे करीब 15 फल आते हैं.”
प्रताप कुमार ने बताया कि इन विशालकाय कटहलों को उगाने के लिए किसी भी तरह के रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया गया है. वे इसे पूरी तरह प्राकृतिक रूप से उगा रहे हैं.
मलनाड क्षेत्र में स्थानीय रूप से इसे ‘मक्के कटहल’ कहा जाता है. यह फल आकार में जितने विशाल हैं, स्वाद में उतने ही लाजवाब और मीठे हैं. ये कटहल लगभग 12 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इसकी खासियत यह है कि केवल इसका बीच का हिस्सा चिपचिपा होता है, जबकि बाकी का पूरा हिस्सा रेशेदार होता है.
इतने कीमती और रिकॉर्ड बनाने वाले कटहलों को प्रताप कुमार बाजार में बेचते नहीं हैं. उन्होंने बताया, “मैंने अब तक एक भी कटहल बाजार में नहीं बेचा है. हमारे दोस्त और परिचित ही इसे चाव से ले जाते हैं.” प्रताप की अब बस एक ही इच्छा है कि कटहल की इस अनोखी और बेहतरीन किस्म को कृषि क्षेत्र में और ज्यादा विकसित और बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

