आगामी 28 जुलाई को उप्र के ग्रामीण बैंकों में कार्यरत कर्मचारी और उनकी यूनियनें दिल्ली के संसद भवन के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। क्योंकि उप्र के ग्रामीण बैंकों में अब 10 से शाम 5 बजे तक निरंतर काम करने और वित्तीय लेनदेन के आदेश किये गये जिससे इनमें कार्यरत कर्मियों का भोजन अवकाश खत्म होने से रोष है।
खबर के अनुसार देश के सबसे बड़े ग्रामीण बैंक में अब लंच टाइम यानी भोजनावकाश नहीं होगा। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखाओं में अब सुबह 10 से शाम पांच बजे तक लगातार वित्तीय लेनदेन सहित अन्य कार्य होंगे। इस आदेश से बैंक कर्मियों में नाराजगी है। आगामी 28 जुलाई को इसके खिलाफ नई दिल्ली में संसद भवन के समक्ष प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।
बड़ौदा यूपी बैंक, आर्यावर्त बैंक और प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक के विलय के बाद बने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक ने ग्राहक सेवा व नकद लेन-देन के लिए समय संबंधी संशोधित आदेश जारी किया है। े मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि बैंक का कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक और नकद लेनदेन का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे रहेगा। शाखाएं सोमवार से शनिवार तक कार्य करेंगी। रविवार तथा दूसरे व चौथे शनिवार को अवकाश रहेगा।
उक्त आदेश के बारे में पढ़कर ही यह अहसास होता है कि इसका विरोध शुरू होगा। तो फिर जारी करने वाले विभाग ने इस संदर्भ में क्यों नहीं सोचा। क्योंकि बैंक ग्रामीण हो या राष्ट्रीयकृत कर्मचारियों व अधिकारियों की सोच एक सी होती है। कई उपभोक्ताओं का मानना है कि अगर मानव संस्थान विभाग द्वारा जारी यह आदेश सभी बैंकों के लिए लागू होता तो विरोध तब भी होता मगर क्योंकि सभी के लिए एक समान नीति के चलते शायद ग्राहकों को भी पूरी सुविधाएं मिलती। आज इस संदर्भ में हुए आदेश की खबर पढ़ने के बाद कई बैंकों के उपभोक्ताओं को यह कहते सुना गया कि बैंक कर्मियों को बेईंतहा सुविधाएं मिली हुई है इसलिए सिर्फ ग्रामीण बैंक में भोजन अवकाश समाप्त करने की बजाए अगर सभी बैंकों में ऐसा किया जाता तो उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती थी। अब तो ग्रामीण बैंक कर्मियों को उनका समर्थन करने हेतु अन्य बैंकों के कर्मचारियों की यूनियन भी इनके साथ खड़ी होती नजर आऐगी। पहले ऐसा ही होता रहा है। अच्छा तो यह है कि उपभोक्ता हित में सभी बैंकों में एक समान आदेश किए जाते और हड़ताल पर लगाई जाती रोक एवे उलंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होती तो उनके स्थान पर काम करने के लिए बेरोजगार नौजवान जो हर क्षेत्र में सक्रिय है उनकी भर्ती का रास्ता खोला जाता तब शायद हड़ताल भी नहीं होती और बैंकों में 10 से 5 तक काम का माहौल भी थोडी बहुत समस्या के बाद काम का माहौल बनता अगर भोजन अवकाश के समय की सीमा घटाई जाती लेकिन खाना खाने का समय जरूर दिया जाना चाहिए था।
(प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)
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