गाजियाबाद 09 जुलाई। जिला मानसिक चिकित्सालय बरेली से जांच के लिए भेजे गए नमूने में मिर्गी की दवा सोडियम वैल्प्रोएट 500 एमजी अधोमानक पाई गई है। प्रदेश में इस बैच की दवा के वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। संबंधित दवा हिमाचल प्रदेश की कंपनी बनाती है। अब शासन स्तर पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। प्रदेश के सभी जिलों से दवा का रिकार्ड तलब किया गया है। वेयरहाउस और अस्पतालों में उपलब्ध दवा वापस मंगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
30 अप्रैल को जिला मानसिक चिकित्सालय, बरेली से सोडियम वैल्प्रोएट 500 एमजी (40 टैबलेट) के बैच नंबर टीजीटी 25-103 का नमूना जांच के लिए भेजा गया था। 17 जून को जांच रिपोर्ट में दवा अधोमानक पाई गई। अपर निदेशक (औषधि भंडार ) ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) और सरकारी अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (सीएमएस) को पत्र जारी कर संबंधित बैच की दवा के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए ।
सोडियम वैल्प्रोएट 500 एमजी चिकित्सक के पर्चे पर मिलने वाली एंटी-एपिलेप्टिक दवा है। इसका उपयोग मुख्य रूप से मिर्गी के दौरे (फिट्स) के उपचार, बाइपोलर डिसआर्डर के प्रबंधन और माइग्रेन की रोकथाम में किया जाता है। यह मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि को नियंत्रित कर प्रभाव दिखाती है। मनोचिकित्सक डा. साकेतनाथ तिवारी का कहना है कि वैल्प्रोएट एक बहुमुखी दवा है जिसका उपयोग विभिन्न न्यूरोलाजिकल स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है। इसे मुख्य रूप से मिर्गी के लिए विभिन्न प्रकार के दौरों को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित किया जाता है।
सीएमओ डा. सचिन चंद्र वैश्य का कहना है कि दवा वितरण पर रोक लगाने संबंधी पत्र मिला है। सभी जिला अस्पताल, संयुक्त अस्पताल, सीएचसी, यूपीएचसी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के प्रभारियों को दवा के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। वेयर हाउस, सीएमएसडी एवं अन्य दवाओं के स्टोर से इस दवा की वर्तमान उपलब्धता का रिकार्ड जुटाया जा रहा है।

