मेरठ 09 जुलाई (प्र)। पारंपरिक हुनर को आधुनिक पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। बढ़ई, लोहार, सुनार, दर्जी, कुम्हार, मोची, नाई, राजमिस्त्री और हलवाई जैसे पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को इस वर्ष आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए मेरठ में 1500 कारीगरों को प्रशिक्षण के बाद आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। योजना के जरिए चयनित कारीगरों को केवल औजार ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से काम करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, नई तकनीक अपनाने, पैकेजिंग, ब्रॉडिंग, विपणन और स्वरोजगार बढ़ाने के तरीके सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने पर लाभार्थियों को उनके व्यवसाय के अनुरूप आधुनिक टूलकिट दी जाएगी, जिससे वे अपने काम को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें। इस योजना का असर जिले में पहले से दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में 1250 कारीगरों को आधुनिक टूलकिट दी गई थी। साथ ही पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे कई कारीगरों ने अपना रोजगार बढ़ाया और आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र ने इस वर्ष अधिक से अधिक पात्र कारीगरों को योजना से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली है। विभाग का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है।
समय रहते आवेदन करें योजना का लाभ उठाएं
जिला उद्योग प्रोत्साहन उद्यमिता विकास केंद्र के डिप्टी कमिश्नर अमरेश पांडे ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक और बेहतर उपकरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में जिले के 1250 कारीगरों को टूलकिट दी गई थी। इस वर्ष 1500 कारीगरों को योजना से जोडने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने पात्र कारीगरों से अपील की कि वे समय रहते ऑनलाइन आवेदन करें, ताकि प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट का लाभ प्राप्त कर अपने रोजगार को मजबूत बना सकें।

