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    Home»देश»पांचवी मंजिल तक ही पानी की बौछार कर पाया अग्निशमन विभाग! भ्रष्ट अफसरों को दो साल की जेल और जुमाने का ? सरकार विकास के साथ उनके फायदे नुकसान की योजना भी बनाएं
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    पांचवी मंजिल तक ही पानी की बौछार कर पाया अग्निशमन विभाग! भ्रष्ट अफसरों को दो साल की जेल और जुमाने का ? सरकार विकास के साथ उनके फायदे नुकसान की योजना भी बनाएं

    adminBy adminJune 6, 2026No Comments5 Views
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    लगता है कि अब देर से ही सही सरकार की निगाह भ्रष्ट अधिकारियों पर टेढ़ी होने लगी है। क्योंकि कुछ दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में आग की घटना के बाद नोएडा में बहुमंजिली इमारत में बीते दिवस लगी आग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वैसे तो यह एक प्रकार की आपदा है कब कहां क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता मगर ऐसी घटनाओं को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं वो वाकई सोचने के लिए मजबूत करते हैँ कि सरकारी योजनाओं को कुछ अफसर पलीता लगाकर नागरिकों की जान से क्यों खेल रहे हैं। विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं की आड़ में जो कर रहे हैं आखिर वो कब रुकेगा। पिछले कुछ वर्षों में देश में जहां जहां आग की घटनाएं हुई या बारिश का पानी भरा और कितने ही लोग उसकी भेंट चढ़ गए उससे दिखाई देता है कि यह सब सरकारी अफसरों के आपस में तालमेल ना होने और सरकारी नीतियों को ध्यान में ना रखने का परिणाम है। एक तरफ हम बहुमंजिली इमारतों के नक्शे पास कर रहे हैं लेकिन उनसे संबंध अन्य व्यवस्थाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जैसो नोएडा में १२वी मंजिल पर लगी आग बुझाने के लिए आए फायर ऑफिसर आग बुझाने की व्यवस्था सिर्फ पांचवी मंजिल तक ही कर पाए बाकी मंजिलों की ओर बौझारे फेंकी गई लेकिन यह पूरी तौर पर सफल अभियान नहीं कह सकते। मैं हमेशा सरकार का ध्यान कई दशक से इस ओर दिलाता चला आ रहा हूं कि आपदाओं सरकारी नीति के उल्लंघन से होने वाली घटनाओं के लिए जिम्मेदार भ्रष्ट अफसरों की जेब से हो नुकसान की वसूली। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने मालवीय नगर की घटना को ध्यान में रखते हुए भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारियों से नुकसान की वसूली करने का फैसला किया है। जिसके तहत आपदा प्रबंधन अधिनियम २००५ के तहत अधिकतम दो साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यह अपने आप में शुरुआत ही सही लेकिन एक अच्छी पहल है लेकिन ऐसे कानून पहले से ही है मगर उसके अनुसार कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती।
    यह बात सोचने की है। क्योंकि मुझे लगता है कि चोर चोर मौसेरे भाई और मेड़ ही खेत को खा रही की कहावत कुछ नौकरशाहों पर सही उतरती है क्योंकि ईमानदार अफसर भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं का कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं क्योंकि दो नंबर की कमाई को खर्च कर भ्रष्ट अफसर बच जाते हैं। मेरा मानना है कि अगर हम कोई नई नीति बनाते हैं तो उसके फायदे नुकसान को ध्यान में रखकर हमें अन्य तैयारियां भी करनी चाहिए। फिर भी अगर किसी की गलती नजर आती है तो उसे जैसा दिल्ली की सीएम ने किया है ऐसे लोगों को समय पूर्व सेवानिवूति और इनसे नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए क्येांकि किसी के दोष का खामियाजा आम आदमी क्यों भुगते। मुझे लगता है कि देशवासियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र और प्रदेश सरकार पूर्व में भी लापरवाह नौकरशाहों को समयपूर्व सेवानिवृति देती रही है। अब समय आ गया है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और बीते दिनों हाईकोर्ट का एक फैसला आया कि भ्रष्ष्टाचार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मुझे लगता है कि आम आदमी की जान बचाने के लिए किसी भी प्रकार के नुकसान और आपदा और नीतियों का उल्लंघन करने वाले सरकारी बाबूओं के खिलाफ कार्रवाई हो तभी यह लाखों करोड़ों के घोटाले, आगजनी और इमारतों पुल के ढहने सड़कों के टूटने और सफाई के लिए आने वाले बजट की बंदरबाट करने वालों को जेल और नुकसान की वसूली उसकी निजी संपत्ति से की जाए और इसमें अगर कोई जनप्रतिनिधि दोषियों को बचाने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। मुझे लगता है कि तभी पीएम मोदी और सभी सीएम व जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं पूरी होगी और खुशहाली का माहौल बनेगा।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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