हमेशा देश की मजबूती को सामने रखकर जीवनभर गरीब मजदूरों बेसहारा लोगों की मदद और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते रहे पूर्व प्रधानमंत्री स्व चौधरी चरण सिंह को देशभर में उनके प्रशंसकों और चाहने वालों के द्वारा उनकी पुण्यतिथि पर नमन करते हुए चौधरी साहब के दिखाए मार्ग पर चलने और ईमानदार शासन प्रशासन में सहयोग देने का संकल्प लिया गया। बताते चलें कि युवा काल से ही जनहित की सोच वाले चौधरी चरण सिंह हमेशा महात्मा गांधी की विचारधारा को अपनाकर चलते रहे। उन्होंने अपने जीवन में पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह एडवोकेट जैसे ईमानदार शख्सियत को विधानसभा में भेजा और वह बेदाग छवि को राजनीति में आगे बढ़ाने के पक्षधर रहे। चौधरी चरण सिंह आर्यसमाजी थे लेकिन सनातन धर्म का कभी उनके द्वारा विरोध नहीं किया गया और सभी धर्मों को वह मान्यता देते रहे। मैंने चौधरी चरण सिंह को काफी नजदीकी से देखा। इमरजेंसी के बाद १९७७ से मजदूरी करते हुए सरदार तीरथ सिंह के कहने से रूझान बढ़ा तो चौधरी चरण सिंह के अलावा किसी को अपना नेता नहीं माना क्योंकि उनके सिद्धांत स्पष्ट थे और अमीर गरीब हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सब एक समान थे। कुछ लोग उन्हें जातिवादी नेता कहते रहे हैँ लेकिन अगर देखें तो उन्होंने सबसे पहले अपनी पार्टी का कोषाध्यक्ष एक वैश्य को दिया और मेरे जैसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री रहते हुए मेरठ महानगर का पार्टी महासचिव बनाया जिस पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी टिप्पणी लिखी थी। यह बात यह सिद्ध करती है कि वह गरीब अमीर में फर्क महसूस नहीं करते थे। पार्टी महासचिव बननने के समय मैं कैंट के सदर बाजार में पल्लेदारी करता था। वह मुझ जैसे कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने में कोई कोताही नहीं बरतते थे। उन्होंने बनारसी दास चांदना को विधायक बनाया। एक समय ऐसा था कि बिहार में कर्पूरी ठाकुर, हरियाणा में ताऊ देवी लाल और राजस्थान में एक बडे नेता लोकदल की कमान संभालते थे और कई प्रदेशों में चौधरी चरण सिंह का बोलबाला था। यूपी में तो वह सर्वमान्य नेता थे। मैंने कभी किसी नेता से चौधरी चरण सिंह की आलोचना नहीं सुनी। पिछड़ों दलितों के उत्थान में उनके द्वारा काफी काम किया गया। आपातकाल के बाद हुए चुनाव में उनकी पार्टी के दो दर्जन सांसद बने। जिससे कह सकते हैं कि यूपी में उनका दबदबा था। उन्हीं का प्रताप था कि उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह केंद्र में मंत्री रहे और अब उनके पौते जयंत सिंह केंद्र में स्वतंत्र प्रभार मंत्री है और पिछले साल उन्हें केंद्र ने भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। सभी दलों के नेताअेां का मानना था कि सरकार ने उन्हें भारत रत्न देकर बहुत अच्छा कार्य किया है। उनकी पुण्यतिथि पर मैं भी उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए नमन करता हूं और यह उम्मीद करता हूं कि जयंत चौधरी एक समय आएगा जब उन्हीं की तरह कार्यकर्ताओं को जोड़कर देश में लोकदल को चौधरी चरण सिंह साहब जैसी मजबूती और नेतृत्व प्रदान करेंगे। एक बार मैंने देखा कि उनकी स्पष्टवादिता किस प्रकार से बोलती थी। कुछ किसान उनके पास दिल्ली पहुंचे और समस्याएं बताई। तब चौधरी चरण सिंह ने उनसे कहा कि मेरी टोपी में और गन्ना बो दो तो सब समझ गए कि वह मदद तो करते हैं लेकिन सबक सिखाने मे लाग लपेट नहीं किया जाता। मेरठ में वह शिवाजी रोड पर अपने बहन और भांजे राजेंद्र सिंह और एम प्रकाश के सामने अपने गुरू विष्णु शरण दुबलिश और ढोलकी मोहल्ले में रहने वाले शेर सिंह और अधिवक्ता नरेंद्र पाल और रोटेरियन गजेंद्र सिंह धामा से उनका विशेष लगाव था और जब भी यहां आते थे तो उनके निवास पर ही चले जाते थे। कहने का मतलब है कि चौधरी चरण सिंह का कर्मक्षेत्र मेरठ था। छपरौली से वह चुनाव लड़े। इसलिए यह क्षेत्र उनकी राजनीतिक उपलब्धियों की साक्षी रहा। आज देश को चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं की बड़ी आवश्यकता है नागरिकों की इस बात से मैं भी सहमत हूं। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह को अब परिषदीय विद्यालयों में कक्षा आठ की किताब में उनकी जीवनी पढने को मिलेगी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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