नई दिल्ली, 29 मई (ता)। पहलवान विनेश फोगाट को गत दिवस सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्हें 30 मई से होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी।
भारतीय कुश्ती संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि विनेश फोगाट को ट्रायल में भाग लेने दिया जाए।
हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के दृष्टिकोण पर सवाल भी उठाए। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले को मातृत्व अवकाश और कठिनाई के नजरिए से देखा, जबकि असली मुद्दा इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के नियमों के पालन का था।
कोर्ट ने कहा कि भारतीय खेल व्यवस्था वैश्विक खेल मानकों से जुड़ी हुई है और डोपिंग टेस्ट से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “आप बेहतरीन पहलवान हैं, आपने देश का नाम रोशन किया है, लेकिन देश पहले है।”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विनेश फोगाट ने दिसंबर 2024 में ब्रेक लिया था और अगस्त 2025 में वापसी की बात कही थी। बाद में जुलाई 2025 में वह मां बनीं और WFI को सूचित किया कि वह 1 जनवरी 2026 से उपलब्ध होंगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि विनेश ने जनवरी में डोपिंग टेस्ट मिस किया था और इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हरियाणा विधानसभा में विधायक के तौर पर मौजूद रहने की उनकी दलील स्वीकार नहीं की थी। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हाईकोर्ट ने WFI की नीति को “एक्सक्लूजनरी” कहा कि जबकि नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं।
विनेश फोगाट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलील दी कि मामला उनके मातृत्व अवकाश से जुड़ा है और उन्हें ट्रायल में मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर विनेश को ट्रायल में हिस्सा लेने से रोका गया तो यह राष्ट्रीय शर्मिंदगी होगी। दीवान ने यह भी आरोप लगाया कि WFI ने चयन नीति में बदलाव कर विनेश को बाहर करने की कोशिश की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल राहत वापस नहीं लेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 22 मई को आदेश दिया था कि विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा था कि मातृत्व अवकाश के कारण किसी महिला खिलाड़ी को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) व भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की निगरानी में ट्रायल कराने का भी निर्देश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने WFI की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की आगे सुनवाई करने की बात कही है, लेकिन फिलहाल विनेश फोगाट के ट्रायल में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हो गया है।
गोंडा प्रतियोगिता से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 11 मई को विनेश फोगाट गोंडा में आयोजित ओपन सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंची थीं। हालांकि, भारतीय कुश्ती संघ ने उनसे 15 बिंदुओं पर जवाब मांगते हुए आगामी प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगा दी थी। इसी वजह से वह गोंडा की प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। इसके बाद विनेश फोगाट ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। पहले उन्हें सिंगल बेंच से राहत नहीं मिली, लेकिन बाद में डबल बेंच ने ट्रायल प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। अब इसी आदेश को चुनौती देते हुए WFI सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
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