मेरठ 23 मई (प्र)। शास्त्रीनगर में सेटबैक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच सीधी टकराव की स्थिति में पहुंचता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है, जबकि दूसरी तरफ छोटे प्लॉटों पर बने मकानों में रह रहे परिवार की महिलाएं लगातार आंदोलन कर रही हैं। हालात को देखते हुए अब प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है।
कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी ने परिषद अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में एडीएम सिटी अनिरुद्ध प्रताप सिंह को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई। तय हुआ कि अब मजिस्ट्रेटों की टीम शास्त्रीनगर में घर- घर जाकर लोगों को सेटबैक देने के लिए समझाएगी। इसके बावजूद लोग नहीं माने तो प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर चलाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
दरअसल, शास्त्रीनगर में सुप्रीम कोर्ट के अनुपालन में पहले ही 44 संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद मकानों पर सेटबैक संबंधी नोटिस चस्पा किए गए हैं। छोटे प्लॉटों पर बने मकानों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि यदि सेटबैक दिया गया तो उनका घर ही नहीं बचेगा इसी मुद्दे को लेकर महिलाएं लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही हैं। परिषद अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों का विरोध बन गया है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। ऐसे में परिषद के पास कार्रवाई पूरी करने के लिए करीब दो महीने का ही समय बचा है। यही वजह है कि प्रशासन अब सीधे हस्तक्षेप कर रहा है।
अब मजिस्ट्रेट और पुलिस संभालेंगे मोर्चा
शास्त्री नगर में लोगों को मनाने के लिए परिषद की आठ टीमें पहले से क्षेत्र में काम कर रही हैं। अब इनके साथ मजिस्ट्रेट परिषद अधिकारी और पुलिस फोर्स भी मौजूद रहेगी। प्रशासन का कहना है कि जहां संभव होगा, वहां राहत देने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हर हाल में कराया जाएगा। यदि नक्शे के विपरीत निर्माण मिला तो कार्रवाई तय मानी जा रही है।

