लखनऊ, 21 मई (ता)।योगी सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सपा सरकार (वर्ष 2012 से 2017) में मेरठ व बागपत में हुए घोटाले का राजफाश किया है। यहां छात्रवृत्ति, श्हमारी बेटी उसका कलश् योजना और वक्फ संपत्तियों से जुड़े जिन महत्वपूर्ण अभिलेखों को लंबे समय से श्गायबश् बताया जा रहा था, वे मेरठ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय की अलमारियों से बरामद हुए हैं।
जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड जानबूझकर छिपाकर रखे गए थे, ताकि आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) और शासन स्तर पर चल रही जांच प्रभावित हो सके।
मामले को गंभीर मानते हुए सरकार ने मेरठ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रूहेल आजम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वर्ष 2012 से 2017 के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धनराशि के गबन की शिकायतें योगी सरकार को प्राप्त हुई थीं। इनमें करीब 10 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता, हमारी बेटी उसका कल योजना में अपात्रों को लाभ देने तथा वक्फ संपत्तियों के खुर्द-बुर्द करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इन मामलों की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है।
जांच के दौरान शासन, जांच समिति और ईओडब्ल्यू लगातार मेरठ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से संबंधित अभिलेख और वित्तीय दस्तावेज मांगते रहे, लेकिन हर बार रिकार्ड गायब होने की बात कही जाती रही। यहां तक कि छात्रवृत्ति प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण डिस्पैच रजिस्टर तक उपलब्ध न होने का दावा किया जाता रहा।
मामला गंभीर होने पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव संयुक्ता समद्दार ने जिलाधिकारी मेरठ को मजिस्ट्रेट स्तर से स्थलीय जांच कराने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने छात्रवृत्ति, “हमारी बेटी उसका कल”, वक्फ संपत्तियों, बजट पत्रावलियों, लाभार्थी सूचियों, कैशबुक और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सहित बड़ी मात्रा में अभिलेख बरामद किए। जांच में पाया गया कि ये सभी दस्तावेज कार्यालय की अलमारियों में रखे थे और उनकी जानकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भी थी। जिलाधिकारी ने अभिलेखों को नौ बंडलों में बांधकर पांच बक्सों में सुरक्षित कराया और डबल लाक कर लखनऊ निदेशालय में भिजवा दिया है। अब इन फाइलों को ईओडब्ल्यू प्रथम दृष्टया जांच में माना गया कि रूहेल आजम ने जानबूझकर अभिलेख छिपाकर जांच को बाधित किया तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों को दबाने का प्रयास किया। यह भी माना जा रहा है कि महत्वपूर्ण रिकॉर्ड छिपाकर पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों में शामिल लोगों को संरक्षण देने और जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
सरकार ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने रूहेल आजम को निलंबित करते हुए निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है।
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