मुंबई 20 मई। उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में जन्मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब 17 साल के हुए तो उनके एक घर में टीवी आया। एक दिन नवाज की नजर पड़ोस में रहने वाली लड़की पर पड़ी। पहली नजर में ही उन्हें उस लड़की से प्यार हो गया। वो लड़की रोज टीवी देखने एक घर में जाती तो पीछे-पीछे नवाज भी वहीं जाने लगे। दोनों घंटों उस घर में बैठते और कई बार नजरें टकरातीं। एक दिन नवाजुद्दीन ने हिम्मत कर लड़की का हाथ पकड़ लिया और कहा- टीवी मत देखो, मुझे देखो। लड़की ने जवाब दिया- मैं तो टीवी ही देखूंगी। इस पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने तैश में कहा- देखना, एक दिन मैं भी टीवी पर आऊंगा। नवाज को गुस्सा करते देख लड़की उनका हाथ झटक कर वहां से चली गई। उसने भी एक पल के लिए जरूर सोचा होगा कि एक छोटे से गांव का सांवला, आम सी शक्ल का दुबला-पतला ये लड़का हीरो बनेगा? कुछ साल बाद नवाजुद्दीन ने अपनी कही बात सच कर दिखाई। ये मुमकिन हो सका उनकी लगन, संघर्ष और काबिलियत से, जिसे नवाजुद्दीन ने साल-दर-साल निखारा। इस सफर में नवाजुद्दीन कभी वॉचमैन बने, तो कभी 100 रुपए का नुकसान होने से 19 किलोमीटर पैदल चले। कभी तीन वक्त चाय-बिस्कुल में गुजारा किया, तो कभी स्टूडियो से बेइज्जती कर निकाले गए।
कभी टीवी पर वेटर बने, चोर बने, तो कभी गुंडे, लेकिन फिर हुनर की बदौलत उनकी गिनती बॉलीवुड के सबसे मंझे हुए एक्टर्स में की जाने लगी। उनके कहे गए डायलॉग- ‘बाप का, दादा का, भाई का सबका बदला लेगा तेरा फैजल….’, ‘आखिर चाहिए क्या औरत को….’, ‘मैं 15 मिनट तक अपनी सांस रोक सकता हूं, मौत को छू के टक से वापस आ सकता हूं…’, आज भी चाहनेवालों की जुबां पर रटे रहते हैं। वजह है उनका हुनर, कहने का सलीका और दमदार अभिनय।
आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी 52 साल के हो चुके हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) में जमींदार के घर हुआ। प्री-मैच्योर नवाज 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। घरवाले खेती-किसानी करते थे, लेकिन नवाजुद्दीन को पढ़ाई में दिलचस्पी थी।
10 की उम्र में पिता ने अखाड़े भेजा, लेकिन बार-बार पिटाई होने पर उन्होंने इसे जारी रखने से इनकार कर दिया। शुरुआती पढ़ाई गांव से हुई और फिर पिता ने उनकी रुचि की कद्र करते हुए केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के लिए उनका दाखिला हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में करवा दिया।
पढ़ाई के बाद उनकी वडोदरा की केमिकल फेक्ट्री में चीफ केमिस्ट की नौकरी लग गई। नवाज अपने परिवार के इकलौते थे, जिन्होंने ग्रेजुएशन किया था। एक महीने में ही नवाज इस काम से ऊब गए और नई नौकरी की तलाश में दिल्ली निकल पड़े।
एक दिन मंडी हाउस में दोस्त का प्ले देखने गए नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने खुद भी एक्टिंग करने का फैसला कर लिया। उन्हें महसूस हुआ कि यही वो काम है, जिसे करके मैं कभी बोर नहीं हो सकता। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेने के लिए एक प्ले ग्रुप जॉइन कर लिया। दरअसल, दाखिले के लिए स्टूडेंट के लिए 10 प्ले करना अनिवार्य होता था।
प्ले के दिनों में गुजारा करना मुश्किल होने लगा। एक दिन नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन के बाहर बने सुलभ में पेशाब करते हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी की नजर सामने चिपके पैंप्लेट पर पड़ी। लिखा था, 500 सिक्योरिटी गार्ड, 300 वॉचमैन चाहिए।
उस कंपनी के शाहदरा ऑफिस पहुंचे, तो कहा गया, नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 5 हजार सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे।
नवाजुद्दीन ने हामी भर दी। वो गांव गए, मां के सोने के गहने गिरवी रखकर पैसे लिए, जिसके डिपॉजिट से उन्हें नोएडा की एक खिलौने बनाने वाली कंपनी में वॉचमैन की नौकरी मिल गई।

