नई दिल्ली, 14 मई (ता)। भगवान शिव के स्वरूप की कल्पना करते ही गले में लिपटे नाग, माथे पर चंद्रमा और गले की मुंडमाला सामने नजर आती है। जहां नाग और चंद्रमा उनके सौम्य और शक्तिशाली रूप को दिखाते हैं, वहीं मुंडमाला अक्सर लोगों के मन में जिज्ञासा और रहस्य पैदा करती है।
कई लोग इसे वैराग्य का प्रतीक मानते हैं, लेकिन पौराणिक ग्रंथों में इसके पीछे एक अमर प्रेम की कथा छिपी है। इस कथा का वर्णन मुख्य रूप से श्रीमद् देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कंध में कहा गया है। इसके अलावा शिव पुराण में इसके बारे में विस्तार से कहा गया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
नृमुण्डमालाभरणां शशाङ्ककृतशेखराम्।
दिगम्बरं भस्मलिप्तं वन्दे देवं महेश्वरम्॥
एक बार माता सती ने महादेव से सवाल किया कि स्वामी, आप अमर हैं, लेकिन मुझे हर युग में अपना शरीर त्यागना पड़ता है और फिर कठिन तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना पड़ता है। ऐसा क्यों?
सती के इस सवाल पर महादेव पहले तो मुस्कुराए, लेकिन फिर उन्होंने एक ऐसा राज खोला जो आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। महादेव ने कहा कि देवी मेरे गले में जो मुंडमाला आप देख रही हैं, इसमें मौजूद हर एक खोपड़ी आपकी ही है।
श्लोक
मम कण्ठे स्थिता माला तव देहसमुद्भवा।।
माता सती के हैं ये मुंड
महादेव ने सती से कहा कि वे अजर-अमर हैं, लेकिन सती को हर जन्म के बाद अपना शरीर त्यागना पड़ा। महादेव सती से इतना प्रेम करते थे कि जब भी सती का अंत होता, वे उनके प्रेम की याद के रूप में उनके मस्तक को अपनी माला में पिरो लेते थे। इस तरह, सती ने अब तक जितने भी जन्म लिए उन सभी के मुंड महादेव ने अपने हृदय के पास धारण किए हुए हैं।
माला में 108 ही मुंड क्यों?
ऐसी मान्यता है कि जब माता सती का 108वां जन्म पार्वती के रूप में हुआ और उन्होंने महादेव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया, तब यह चक्र पूरा हुआ। यही वजह है कि शिव की मुंडमाला में 108 मुंड माने जाते हैं, जो सती के 107 पूर्व जन्मों और उनके अटूट अस्तित्व का प्रमाण हैं।
शिव ही अनंत हैं
आध्यात्मिक दृष्टि से यह मुंडमाला इस बात को दिखाते हैं कि संसार शिव ही सत्य और अनंत (जो कभी खत्म न हो) हैं। वहीं, यह माला अहंकार के विनाश और जीवन-मृत्यु के चक्र के सच को भी दिखाती है।
अस्वीकरण : इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। ताजा खबर यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। ताजा खबर अंधविश्वास के खिलाफ है।
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