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    Home»देश»3 महीने के नवजात के पेट में था 8 हफ्ते का भ्रूण, डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बाहर निकाला
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    3 महीने के नवजात के पेट में था 8 हफ्ते का भ्रूण, डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बाहर निकाला

    adminBy adminJuly 11, 2026No Comments5 Views
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    बरेली 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद स्थित रामपुर गार्डन के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक ऐसा अत्यंत दुर्लभ ऑपरेशन किया है, जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया है. शाहजहांपुर जिले के कलान क्षेत्र के रहने वाले एक किसान दंपति के 3 महीने के मासूम बेटे के पेट से डॉक्टरों ने करीब 8 सप्ताह का विकसित भ्रूण सफलतापूर्वक बाहर निकाला है. चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति को फीटस इन फीटू (Fetus in Fetu) कहा जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, बरेली में यह अपनी तरह का दूसरा मामला है और दुनिया भर में भी इसके बहुत ही गिने-चुने मामले दर्ज हैं.

    दरअसल, बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद से ही उसे दूध पचाने में भारी दिक्कत होने लगी थी. वह लगातार उल्टी कर देता था. धीरे-धीरे उसका पेट असामान्य रूप से फूलने लगा और छूने पर पेट के भीतर एक बड़ी गांठ महसूस होने लगी. परेशान माता-पिता बच्चे को जांच के लिए एक निजी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने जब बच्चे का अल्ट्रासाउंड और अन्य जरूरी टेस्ट किए, तो रिपोर्ट देखकर सब चौंक गए. बच्चे के लिवर के ठीक नीचे एक असामान्य मानव संरचना विकसित हो रही थी, जिसमें बारीक बाल, हड्डियां और अंगुलियों जैसे अंग साफ नजर आ रहे थे.

    चूंकि मामला बेहद पेचीदा था, इसलिए शुरुआत में मेडिकल कॉलेज में इस संवेदनशील ऑपरेशन को करने से मना कर दिया गया था. इसके बाद बेबस परिवार बच्चे को लेकर रामपुर गार्डन के प्रसिद्ध पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राजीव अग्रवाल के पास पहुंचा. डॉ. अग्रवाल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चुनौती स्वीकार की और ऑपरेशन का फैसला लिया: डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने करीब 13 वर्ष पहले भी बरेली में ऐसा ही एक दुर्लभ ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया था. उसी पुराने अनुभव के आधार पर पूरी मेडिकल टीम ने बेहद सावधानी से काम किया.

    करीब दो घंटे तक चले इस बेहद जटिल ऑपरेशन के बाद बच्चे के पेट से लगभग 60 ग्राम वजन का भ्रूण सुरक्षित बाहर निकाला गया. डॉक्टरों के अनुसार, यह भ्रूण एक बड़ी सिस्ट (थैली) के अंदर बंद था, जिसमें करीब 200 मिलीलीटर लिक्विड (द्रव्य) भरा हुआ था. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस अंदरूनी भ्रूण को रक्त की आपूर्ति बच्चे के अपने लिवर से हो रही थी और वह लिवर, किडनी तथा आंतों से बुरी तरह चिपका हुआ था. जरा सी चूक बच्चे के अंगों को भारी नुकसान पहुंचा सकती थी.

    डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. दीपक मिश्रा और डॉ. विवेक सक्सेना की विशेषज्ञ टीम ने बेहद सूक्ष्म कुशलता दिखाते हुए भ्रूण को बच्चे के मुख्य अंगों से पूरी तरह अलग कर दिया. सफल ऑपरेशन के बाद मासूम बच्चा अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और उसकी हालत सामान्य बनी हुई है. 

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