मेरठ 09 जून (प्र)। पौराणिक नगरी महाभारतकालीन हस्तिनापुर अब अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को एक आधुनिक स्वरूप में संजोने के लिए तैयार है। हस्तिनापुर में एक बार फिर अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर के साथ ही द्रौपदी की रसोई और चौसर भी दिखेगा।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत हस्तिनापुर में ‘हस्तिनापुर की हस्तियां’ नामक एक भव्य ‘वेस्ट-टू-वंडर’ थीम पार्क विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महाभारत कालीन इतिहास को आधुनिक तकनीक और कला के माध्यम से पर्यटकों के लिए जीवंत करना है। इसके लिए प्रोजेक्ट मंजूर हो गया है। जल निगम के सीएंडडीएस की ओर से कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
पार्क के निर्माण में बड़ी मात्रा में स्क्रैप (कबाड़) और पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) सामग्री का उपयोग किया जाएगा। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि किस प्रकार अनुपयोगी वस्तुओं को कलात्मक रूप में बदला जा सकता है। गंगा तट के निकट विकसित होने वाला यह पार्क केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों के माध्यम से एक यात्रा होगी।
शासन की ओर से इसके लिए 17 करोड़ 78 लाख 32 हजार रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। हालांकि डीपीआर 24.97 करोड़ रुपये की है। प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर कार्रवाई तेज हो गई है और सीएंडडीएस ने संबंधित कंपनियों से प्रस्ताव भी मांगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस थीम पार्क के बनने से हस्तिनापुर न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को एक नई वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
थीम पार्क का यह होगा मुख्य आकर्षण
प्रमुख प्रसंगों का सजीव चित्रण
यहां सम्राट भरत, भगवान कृष्ण, भीष्म पितामह के जन्मस्थल से लेकर कौरवों के जन्म, पांडवों की वापसी, लाक्षागृह, मायासभा, चौसर कक्ष और द्रौपदी की रसोई तक को विशाल प्रतिमाओं और स्मारकों की प्रतिकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

