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    Home»देश»बच्चों से या तो नोट कमवा लो या प्यार बना लो लेकिन उनकी आलोचना करना ठीक नहीं है
    देश

    बच्चों से या तो नोट कमवा लो या प्यार बना लो लेकिन उनकी आलोचना करना ठीक नहीं है

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 27, 2026No Comments22 Views
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    देश में सबसे अच्छी शिक्षा उपलब्ध होने के बावजूद यह जानते हुए कि यहां से पढ़कर बच्चे दुनियाभर में अपनी कामयाबी का परचम फहरा रहे हैं। मां-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा विदेशों में पढ़ाई जरुर करे। ध्यान से देखें तो अगर किसी के पास व्यवस्था है तो गलत हो या सही उसे अपनी इच्छापूर्ति व सोच को विस्तार देना ही चाहिए। मगर इससे आगे चलकर सोचते हैं कि बच्चे अमेरिका में नौकरी करें तो कितने ही लोग कहते हैं कि हमें पैसे का लालच नहीं है क्योंकि भगवान का दिया बहुत है। लेकिन दुनिया के अन्य देशों में जीवन अच्छी प्रकार से कटता है माहौल भी बढ़िया होता है और वेतन भी अच्छा मिलता है। मेहनताना भारत के मुकाबले वहां खूब मिलता है। इस बारे में आप देश के उद्योगपतियों को देखें तो आप यह सोच सकते हैं कि यहां करने के कितने मौके हैं। कितने ही ऐसे मिल जाएंगे जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर तरक्की प्राप्त की है। घर का जोगी जोगी और बाहर का सिद्ध वाली कहावत को आत्मसात करे बैठे कुछ परिवार सिर्फ इस उसमें रहते हैं कि बच्चा बाहर नौकरी और पढ़ाई करे। जब ऐसा होता है तो ज्यादातर बच्चे मां बाप को बाहरी देशों से आर्थिक सहायता और सामान भेजते हैं। जिन्हें पाकर हम संतुष्ट होते हैं और बड़े गर्व से बताते हैं कि हमारे बच्चे पैसा और सामान भेजते हैं। यह सही है कि कुछ परिवार अपनी बच्चियों की शादियां विदेशों में करना चाहते हैं। कई के साथ इसमें बड़े धोखे हो जाते हैं तो हम इसे नसीब का खेल समझकर शांत रह जाते हैं लेकिन उससे सबके लेकर बच्चों की शादी या नौकरी विदेशों में करने के लिए लाखों रूपये भेजते हैं और उनके भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। जब वह वहां पकड़े जाते हैं तो उस समस्या का समाधान आसान नहीं होता तब कहा जाता है कि सरकार कुछ नहीं कर रही। जब आपने बच्चों को गलत तरीके से वहां भेजा तो इसमें सरकार क्या कर सकती है। पिछले दिनों कुछ मामलों में परिवार वाले यह कहते सुने गए कि कैसे बच्चे है मां बाप के अंतिम दर्शन करने भी नहीं आए। वो यह नहीं सोचते कि बच्चे पैसा तो उपलब्ध करा रहे हैं वो नहीं आ पाए तो कुछ कारण रहा होगा लेकिन सब यह भूल जाते हैं कि बच्चे किसी समस्या में होंगे। आंध्र प्रदेश के एक गांव के परिवार ने अपने इकलौते बेटे को अमेरिका भेज दिया और बाप अकेला रह गया। जब बाप मरा तो अंतिम संस्कार करने के लिए बुलाया गया लेकिन वह नहीं आया तो सब से भला बुरा कहा। मेरा मानना है कि आप पढ़ने या नौकरी करने बच्चों को विदेश मत भेजो। देश में भी पढ़ाई का स्तर अच्छा है। जहां तक कमाई की बात है तो देश में भरपेट रोटी मिल रही है। अगर भेज दिया तो फिर ऐेसे मौके पर यह सुनाने की क्या जरुरत है कि बाप को मुखाग्नि देने बच्चा नहीं आया। जहां आपकी औलाद काम कर रही है तो पैसे के बदले वहां उसे कुछ जिम्मेदारी मिलती है। मुफ्त में वहां कोई मोटी रकम नहीं मिलती। नौकरी देने वाले की बिना अनुमति के आप कहीं नहीं जा सकते। जब आप पर कोई कठिनाई आई तो बच्चे पर इतनी जिम्मेदारी होगी कि आना तो दूर बात करना भी संभव नहीं होगी। एक खबर पढ़ी कि पिता के अंतिम संस्कार में बेटी ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई जिस पर यह सुनने को मिला कि बेटी दो दिन की छुटटी लेकर भी नहीं आ सकती थी। अब यह कौन समझाए कि दो दिन तो आने जाने में लग जाते हैं और छुटटी भी नही मिलती है। अब अगर बच्चो को बाहर भेजना है तो यह मोह छोड़ना पड़ेगा कि वह समय पर आकर खड़े हो जाएं। अगर चाहते है कि बच्चे सेवा करें तो विदेश भेजना बंद कर दो । या तो पैसा कमवा लो या प्यार बढ़ा लो। दोनों काम साथ साथ चलना संभव नहीं है। यह बात हमें सोचनी होगी और निर्णय भी लेने होंगे।
    जहां तक मेरा मानना है अगर बच्चों को पढ़ने और नौकरी करने भेजना है तो यह तय करें कि वह कितने समय वहां रहेगा और ऐसा नहीं कर सकते तो सब इच्छाएं तो भगवान भी पूरी नहीं करता। कई परिवार ऐसे देखने को मिलते हैं जिनके यहां बेहिसाब धन संपत्ति दौलत है। वो भ्ीा बच्चों केा विदेश भेजना बेटियों की शादी विदेश में करने से नहीं चूकते।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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