इतना बड़ा देश हजारों सरकारी विभाग और उनमें कार्य करने वाले लाखों कर्मचारी और अधिकारी होते हैं और फिर सेवानिवृत हो जाते हैँ लेकिन जिन पदों पर उन्होंने सेवाएं दी हो उस क्षेत्र के लोग उन्हें याद रखें और उनके काम को सम्मान दें तो वो बिरले ही अफसर होते हैं। १९९८-९९ में मेरठ में एसपी सिटी रहे राजेश कुमार राठौर जिन्होंने लखनऊ में भी अपनी सेवाएं दी थी। आज एक समाचार पढ़कर कि पूर्व एसपी सिटी के बेटे से ३१ लाख की धोखाधड़ी से दिमाग में उथल पुथल मची और ध्यान आकर्षित हुआ। पता चला कि १९९९ बैच के आईपीएस १९५६ में यूपी के फतेहाबाद में जन्मे और वरिष्ठ आईपीएस पद से सेवानिवृत हुए राजेश कुमार राठौर की ईमानदारी, निष्ठा, अपने कार्य क्षेत्र में आने वाली समस्याओं के समाधान करने में अग्रणी राजेश कुमार राठौर भले ही सेवानिवृत हो गए हों लेकिन समाजहित में काम करने वालों के लिए अग्रणी राजेश कुमार राठौर से आम आदमी का सीधा रिश्ता था। मैंने देखा कि जब भी कोई परेशान होता था तो घंटाघर की पुलिस चौकी या पुलिस कार्यालय में उनके पास जाता था और अपनी समस्या बताकर उसका समाधान भी करा ही लेता था। एक बार वह यहां एसपी रहे तो मेरे वेस्ट एंड रोड कार्यालय में चोरी हो गई तो कमिश्नर एन विश्वानाथन डीएम संजय अग्रवाल ने उन्हें कहा कि बिश्नोई की चोरी खुलनी चाहिए तो राजेश कुमार राठौर ने तीन दिन में चोरी का खुलासा कर सामान भी बरामद करा दिया था। ऐसे सक्रिय राजेश कुमार राठौर के पुत्र शेखर राठौर के साथ एएसजी डेवलपर्स प्रा लि जिनका आफिस रामलीला ग्राउंड दिल्ली के पते पर था के द्वारा गंगानगर ओ पॉकेट में पिनाक नाम से आवासीय टावर बनाना शुरू किया गया जिसमें २७ नवंबर २०१७ को टावर में फ्लैट ए-१०४, ३१ लाख ३७ हजार रूपये का लोन कराकर लिया गया था। जो बाद में फ्लैट का बैनामा एएसजी डेवलपर्स संचालकों द्वारा नहीं कराया गया। बताते हैँ कि जब यह खुलासा हुआ कि इन्हेांने उक्त फ्लैट किसी संजय कुमार को दे दिया। बिल्डर संजय गोयल उर्फ टीटू उसकी पत्नी पूनम बहनोई अचल गुप्ता,अचल पत्नी कविता शरद सिंघल अर्चित गुप्ता, विपिन मलिक तुषार गुप्ता, संजय कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह जेल भी गए।
मेरा मानना है कि जिले में डीएम जयशंकार मिश्रा, एसएसपी ब्रजलाल, एसएसपी डॉ कश्मीर सिंह के समान एसपी सिटी राजेश कुमार राठौर और उस समय के एडीएम सिटी जेपी सिंह की जोड़ी सरकार की नीतियों को लागू कराने और जनहित के काम कराने में अग्रणी रहा करती थी। अगर सेवा में रहते हुए कोई जनहित की सोच रखता हो तो सेवानिवृति के बाद तो किसी भी रूप में उनके संपर्क में आए हर व्यक्ति को इनकी मदद के लिए तैयार रहना चाहिए। राजेश कुमार राठौर जैसे कठोर अफसर को कोई परेशानी पड़ी है और उनके परिवार के सामने कोई कठिनाई उत्पन्न हुई है तो मेरा मानना है कि उनके संपर्क में आए व्यक्ति को मदद करनी और उनकी समस्या का समाधान ढूंढने के साथ साथ उनके साथ खड़ा होना चाहिए तभी हम अफसरों व जनप्रतिनिधियों से यह उम्मीद कर सकते हैं कि वह अपने पद का उपयोग हमारी समस्याओं के समाधान करने में करे। क्योंकि ऐसा ही समय सहयोग करने का होता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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