संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली की एसपी देहात अंशिका वर्मा की हुई शादी और इससे जुड़े समारोहों को लेकर बवाल क्यों यह बात समझ से बाहर है। सबसे बड़ी बात कि यूपी के पूर्व सीएम सपा मुखिया ने इस शादी में ना जाने की बात क्यों कही और जो नेता फिर भी गए उनसे इस बारे में पूछने की बात खबरों के अनुसार कही जा रही है। सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों। कुछ लोगों का कहना है कि यह शाही शादी थी। तो ऐसी शाही शादियां तो अब देश में होती हैं तो इसमें ऐसी कौन सी शाही शादी की बात आ गई कि वहां तो जो भी नेता आमंत्रित होते हैं वो शमिल होते हैं तो फिर कृष्ण कुमार बिश्नोई की शादी पर यह ऐतराज क्यों। मुझे लगता है कि अब उनकी शादी की पोस्ट हटाने वालों को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि ना तो कृष्ण कुमार बिश्नोई और ना ही अंशिका वर्मा किसी विवाद में घिरे नजर आए और ना ही किसी राजनीतिक दल से उनका समर्थन सामने आया तो फिर ऐसा क्यों। स्मरण रहे कि हरियाणा के पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल के बेटे की शादी के बाद संसद में उनसे शादी पर खुलेआम खर्च करने पर जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नई तकनीकी का जमाना है कब किसी की फोटो किसी के साथ लगाकर क्या प्रचार करने लगे यह नहीं कहा जा सकता इस बिंदु पर मुझे जवाब देने की जरुरत नहीं है। फिर जब बिहार के सीएम लालू प्रसाद की बेटी की शादी को लेकर बवाल मचाया तो उन्होंने कड़ा जवाब देकर लोगों की बोलती बंद कर दी थी। अब क्योंकि कृष्ण कुमार बिश्नोई और अंशिका वर्मा पुलिस व्यवस्था से जुड़े हैं और उसका उल्लंघन नहीं कर सकते तो वो इस बारे में उठ रहे सवालों और शाही शादी के बारे में कुछ नहीं कह सकते लेकिन इसका विरोध करने वालों को यह समझना चाहिए कि दोनों के माता पिता संपन्न और समाज में प्रमुख स्थान रखते हैं। इसलिए शादी के आयोजन कोई बड़ी बात नहीं है। देश में तो लोग विदेशों में या हजार किमी दूर जाकर शादी के कार्यक्रम कर रहे हैं तब तो कोई नहीं बोलता। सहारनपुर के गुप्ता बंधु जो काफी विवादों में रहे के यहां सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव भी पहुंचे थे। तब तो किसी ने इस मुददे को लेकर सवाल नहीं उठाया तो फिर बिश्नोई समाज से संबंध इस विवाह को लेकर इस तरह की बातें क्यों कही जा रही है। अखिल भारतीय बिश्नोई मिलने के संस्थापक महामंत्री अंकित बिश्नोई और अन्य द्वारा शादी को लेकर सवाल उठाने को गलत बताकर कहा जा रहा है कि अगर शादी शाही भी थी तो किसी को क्या परेशानी है। अपने बेटे बेटी की शादी सभी धूमधाम से करते हैं। शाही शादी को लेकर ऐतराज है तो अपनी पार्टी के नेताओं के संतानों की शादी और रोजाना हो रहे महंगी शादियों को लेकर सवाल पूछा जाना चाहिए। समाज में ऐसी शादियों को लेकर कोई रोक नहीं है। दहेज पर जरुर प्रतिबंध है और वो इसमें लिया गया हो वो कहीं सामने नहीं आया। कहने का मतलब है कि इस शादी के विरोध से बिश्नोई समाज में रोष है उसे ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के आरोप लगने समाप्त होने चाहिए। जमाना अंशिका और कृष्ण कुमार बिश्नोई को बधाई दे रहा है। शादी में भी सभी दलों के नेताओं ने भाग लिया। तो फिर सपा मुखिया ने ही ऐसा क्यों किया।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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