नई दिल्ली, 14 मई (ता)। पश्चिम एशिया संकट के कारण थोक बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में भारी उछाल के परिणामस्वरूप अप्रैल में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई। अक्तूबर 2022 (8.39 प्रतिशत) के बाद पहली बार थोक महंगाई आठ फीसदी के पार दर्ज की गयी है। इससे पहले मार्च 2026 में थोक महंगाई दर 3.88 प्रतिशत रही थी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के गत दिवस जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 की तुलना में इस साल अप्रैल में पेट्रोल की थोक कीमत 32.40 प्रतिशत बढ़ गयी। डीजल की महंगाई दर 25.19 प्रतिशत और रसोई गैस (एलपीजी) की 10.92 प्रतिशत पर रही। कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की थोक महंगाई दर 67.18 प्रतिशत दर्ज की गयी। इस वर्ग में कच्चा तेल 88 फीसदी महंगा हुआ। तिलहनों के दाम भी 22.24 प्रतिशत और खनिजों के 12.15 प्रतिशत बढ़े। खाने-पीने की चीजें सस्ती हुई हैं। आलू की कीमत एक साल पहले के मुकाबले 30 प्रतिशत और टमाटर की 26 प्रतिशत घट गईं। दालें भी चार फीसदी सस्ती हुई हैं। अनाजों के दाम भी घटे हैं।
सब्जियों के दाम में 0.53 प्रतिशत की मामूली सालाना वृद्धि दर्ज की गई। फल 0.21 प्रतिशत सस्ते हुए। वहीं, अंडा, मांस और मछली के दाम 6.68 प्रतिशत और दूध के 2.56 प्रतिशत बढ़ गए। विनिर्मित वस्तुओं में कपड़ों की थोक महंगाई दर 7.30 प्रतिशत रही। तंबाकू उत्पाद 5.67 प्रतिशत महंगे हुए। रसायन और रसायन उत्पादों के दाम एक साल पहले के मुकाबले 5.09 प्रतिशत बढ़े।
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