नई दिल्ली, 16 मई (ता)। दुनिया भर में चिंता बढ़ाने वाला Andes Hantavirus एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में MV Hondius क्रूज़ शिप पर हुए संक्रमण के मामले ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस वायरस से 11 लोग संक्रमित हुए और 3 लोगों की मौत हो गई।
अप्रैल में एक क्रूज़ जहाज़ पर अचानक कई लोग बीमार पड़ने लगे। जांच में पता चला कि यह संक्रमण हंतावायरस के एक खतरनाक स्ट्रेन-Andes Hantavirus-से जुड़ा हो सकता है। इसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को निगरानी में रखा गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस सिर्फ चूहों से ही नहीं, बल्कि इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। कुछ रिसर्च में यह संकेत मिला है कि यह शरीर के तरल पदार्थों जैसे लार, स्तन दूध और स्पर्म के जरिए भी फैल सकता है। इस वायरस के बारे में सबसे बड़ी अनिश्चितता यह भी है कि यह इंसान के शरीर में कितने समय तक सक्रिय रह सकता है और कितने समय तक दूसरों में फैलने की क्षमता रखता है। यही सबसे बड़ा वैज्ञानिक सवाल बना हुआ है।
WHO की टीम इस वायरस पर विशेष शोध कर रही है। WHO की उभरती बीमारियों की विशेषज्ञ टीम इसके प्राकृतिक व्यवहार (Natural History) को समझने की कोशिश कर रही है। इस स्टडी में क्वारंटाइन में रखे गए लोगों के नियमित सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके:
-वायरस शरीर में कितने समय तक रहता है
-क्या रिकवरी के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है
-और क्या यह लंबे समय तक शरीर में छिपा रह सकता है
अगर यह साबित हो जाता है कि वायरस शरीर में लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है, तो इसका मतलब होगा कि ठीक हो चुके मरीज भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और मुश्किल हो जाएगा।
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