आए दिन खबरें पढ़ने को मिलती है कि बिजली विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी तक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस पर बजट भी खूब खर्च किया जा रहा है और अफसरों व कर्मचारियों की भारी भीड़ है जिन पर बेहिसाब आर्थिक साधन खर्च हो र हे है। बिजली आपूर्ति से सब वाकिफ है और समयानुकुल निर्णय लेने का हाल यह है कि कुछ दिन पहले एक समाचार पढ़ा कि स्मार्ट मीटर योजना पर इतने हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद योजना स्थगित हो गई। आज खबर पढ़ी कि गर्मी से राहत पहुंचाने के लिए भगवान के द्वारा रुक रुककर खूब बरसात कराई गई और आंधी हवा खूब चली। ऐसे में पेड़ों के टूटने की बात सामने आती है कि कमजोर हो गए इसलिए गिर गए लेकिन खबर के अनुसार यूपी के मेरठ के पावर कॉरपोरेशन के क्षेत्र में आंधी में उखड़ गए ३०० से ज्यादा खंभे पढ़कर आश्चर्य हुआ और सोचा कि हो सकता है कि जब हर क्षेत्र में प्रगृति हो रही है तो खंभे भी जंग लगे हुए या पुराने जर्जर हालत में लगा दिए गए होंगे जो इस तूफान को नहीं झेल पाए। लगभग पांच दशक में जब से समझ आई है पहली बार ऐसा पढ़ने को मिला कि आंधी तूफान में ३०० खंभे उखड़ गए हो। नागरिकों के अनुसार यह खंभों की खरीद में खेल किए जाने का परिणाम हो सकता है और इससे शायद सभी सहमत होंगे। लगभग दो दशक पूर्व परतापुर बाईपास से करीब ५०० खंभे चोरी होने की बात सामने आई तो लगा कि इसे रोकने की व्यवस्था सो गई होगी। लेकिन खंभे आंधी में उखड़ जाना आश्चर्य की बात है। हमारी केंद्र व प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था बनाने में लगी है। लापरवाहों पर कार्रवाई की बात सामने आती है। ऐसे में मेरा मानना है कि यूपी के सीएम और बिजली मंत्री व उच्चाधिकारियों को ३०० के आंकड़ों की जांच के साथ यह भी देखा जाए कि यह किसके कारण ऐसा हुआ। विद्युत आपूर्ति हमेशा महत्वपूर्ण रही है। इस प्रकार से हवाओं में खंभे उखड़ने लगेंगे तो स्थिति क्या होगी यह किसी को बताने की जरुरत नहीं है। नागरिकों के सामने कोई समस्या हो उससे पहले ही सुधार होना जरुरी कहा जा सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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